Editorial : ‘बेटी पढ़ाओ, खूब खेलाओ’

Editorial : 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग श्रेणी में कांस्य जीतकर मनु पहले ही निशानेबाजी में देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं और अब इस नई कामयाबी के साथ एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने का राष्ट्रीय गौरव एवं ऐतिहासिक कीर्तिमान भी उनके हिस्से आ गया है। मनु की दोहरी सफलता का संदेश साफ है कि ‘बेटी पढ़ाओ, खूब खेलाओ।’
बेटियां भारत का मान एवं शान बनकर दिखायेंगी। मनु ने दो कांस्य पदक ही नहीं जीते, कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। वह ओलंपिक में शूटिंग में पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी ही नहीं बनी, बल्कि भारत की ओर से एक ही ओलंपिक में दो पदक हासिल करने वाली पहली खिलाड़ी भी बनी। दस मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में मनु और सरबजोत सिंह की कामयाबी कई मायनों में खास है क्योंकि उन्होंने कोरिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराकर यह सफलता हासिल की।
कोरियाई टीम में एक वह शूटर भी शामिल थी जिसने रविवार के दस मीटर एयर पिस्टल वर्ग में नये ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। निस्संदेह, देश में खिलाड़ियों की कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें वह वातावरण देने की, जिसमें उनकी प्रतिभा में निखार आ सके। केंद्रीय खेल मंत्री के अनुसार, खेलो इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र सरकार ने मनु भाकर की ट्रेनिंग में दो करोड़ रुपये खर्च किए।
यह सुखद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत दिलचस्पी ने खेल-कूद के प्रति सार्वजनिक प्रयासों को एक नई ऊर्जा दी है। देश के हरेक हिस्से से प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें तराशने वाले अकेले खेलो इंडिया कार्यक्रम के लिए 900 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन इसका प्रमाण है। मनु की यह उपलब्धि इस मायने में भी खास है कि टोक्यो ओलंपिक में उसकी पिस्टल में खराबी आने के कारण वह जीत के दरवाजे के बाहर से ही लौट आयी थी।
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वह लंबे समय तक तकनीकी कारणों से मिली असफलता के तनाव एवं अवसाद से जूझती रही। लेकिन उस असफलता के अवसाद को दरकिनार कर दोहरी सफलता पाना निश्चित रूप से तमाम युवाओं के लिये प्रेरणा की मिसाल बनी है, वास्तव में हमारी नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने का सशक्त माध्यम बनी है।



