Editorial : अग्निपरीक्षा से गुजरेगी मोदी के नेतृत्व वाली सरकार

Editorial: Modi led government will pass the litmus test

Editorial : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को अपने तीसरे कार्यकाल में 1 जुलाई से पहली अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। तीन नए आपराधिक कानूनों-भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के क्रियान्वयन की तिथि एक जुलाई से ही निर्धारित की गई है। देश भर में राज्य बार काउंसिल और बार एसोसिएशन सहित समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है और भारत की संसद द्वारा व्यापक समीक्षा की मांग की जा रही है, जहां देश के लोगों ने अभी-अभी बहुत मजबूत विपक्ष को चुनावों में जिताकर भेजा है।

मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले तीन कानूनों को लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन इस विचार को छोड़ना पड़ा क्योंकि कानूनों ने पूरे देश में कड़ा प्रतिरोध और विरोध ने आकर्षित किया। अधिसूचना के एक सप्ताह बाद ही, देश भर के ट्रक ड्राइवरों ने नये आपराधिक कानूनों के कुछ प्रावधानों के खिलाफ तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। नये कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित होगी जिसमें जीरो एफआईंआर , पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना, एसएमएस (मोबाइल फोन पर संदेश) के जरिये समन भेजने जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सभी जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की अनिवार्यं वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल होंगे।

जीरो एफआईंआर से अब कोईं भी व्यक्ति किसी भी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हुआ हो। नये कानूनों में महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गयी है जिससे मामले दर्ज किए जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी की जाएगी। नये कानूनों के तहत पीिड़तों को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा। महिलाओं, पंद्रह वर्ष की आयु से कम उम्र के लोगों, 60 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों तथा दिव्यांग या गंभीर बीमारी से पीिड़त लोगों को पुलिस थाने आने से छूट दी जाएगी और वे अपने निवास स्थान पर ही पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

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