सरकार पर भारी है एफिलिएटेड कालेजों के प्रबंधन

वेतन मद में नहीं हो रहा है 70 प्रतिशत राशि का भुगतान 

(प्रो अरुण कुमार)

मधुबनी।बिहार के एफिलिएटेड डिग्री कालेजों में शिक्षक और कर्मचारियों का हाल बेहाल है।न तो समय से अनुदान मिल रहा है और न वेतन। इन कालेजों में काम करने वाले कर्मचारियों की जवानी विना वेतन के कट गयी। 2009 में राज्य सरकार ने छात्रों की परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान देना शुरू किया।उस मद में भी 2016 के बाद सरकार ने कोई राशि निर्गत नहीं की है।

इधर एफिलिएटेड कालेजों के शिक्षक और कर्मचारियों के बेहतरी के लिए माननीय उच्च न्यायालय और महामहिम राज्यपाल के आदेशानुसार शिक्षा विभाग ने कालेजों की समस्त आय की 70 प्रतिशत राशि वेतन मद में भुगतान का आदेश दिया।इस संबंध में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने पत्रांक LNMU/IC/262/22 दिनांक 286/22 के द्वारा पत्र जारी कर सभी संबद्ध डिग्री कॉलेजों के अध्यक्ष, सचिव, प्रधानाचार्य और प्रभारी प्रधानाचार्य को निर्देश दिया कि समस्त आय की 70 प्रतिशत राशि वेतन मद में अनुदान के साथ भुगतान कर उपयोगिता प्रमाण पत्र शीध्र समर्पित करें।इस पत्र का असर नहीं के बराबर हुआ। एफिलिएटेड कालेजों के दबंग प्रबंधनों की मनमानी के आगे विश्वविद्यालय प्रशासन की नहीं चली। कालेज में काम करने बाले शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों की स्थिति बद से बदतर बनी रही।इन कर्मियों की स्थिति यह है कि बच्चों की पढ़ाई, बच्चों की शादी, बिजली का बिल, अखबारों का बिल, यहां तक कि अपने लिए दवा की खरीद भी समस्या बनी हुई है। लेकिन सरकार, शिक्षा विभाग और विश्व विद्यालय प्रशासन इन वित्त रहित कालेजों के दबंग प्रबंधनों से कालेज की समस्त आय की 70 प्रतिशत राशि वेतन मद में भुगतान कराने में आज तक असमर्थ हैं।

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