Editorial : दया से भरपूर सादियो मेन
Editorial: Sadio Main full of kindness

Editorial : समाज की सेवा करना और सेवा का दिखावा करने में बहुत बड़ा अंतर है। सच्ची सेवा करने वाला व्यक्ति कभी भी किसी प्रकार के बदले की आशा नहीं करता। राजनीति में करियर बनाने के लिए लोग हमेशा समाज सेवा करने का दिखावा करते हैं। एक ऐसे व्यक्ति जो अपने समाज और देश की सेवा के लिए खेल का सहारा लिया है। अब कोई भी सोचेगा कि खेल से कौन सी समाज सेवा या राष्ट्र सेवा होगी? ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्होंने प्रतियोगिताओं में जीती गई बड़ी रकम गरीबों की सेवा के लिए दान की है।
अमेरिका, कैनेडा और यूरोपीय देशों में इसके कई उदाहरण हैं। भारत में भी ऐसे उदाहरण है। दुनिया में कई तरह के खेल खेले जाते हैं। भारत में लोगों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी क्रिकेट में ही है। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैचों में एक खिलाड़ी है जिसका नाम है सादियो मेन। सादीओ अफ्रीका के एक बेहद ग़रीब देश सेनेगल से हैं। उन्होंने स्वयं भीषण गरीबी का अनुभव किया है और वे अच्छी तरह जानते हैं कि गरीबी क्या होती है। सादीओ को बचपन से ही फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था। जब वह केवल सात वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई। यहां तक कि घरवाले भी उन्हें फुटबॉल खेलने की इजाजत नहीं देते थे।
खेल के मैदान पर सादीओ की गति और गोल करने की क्षमता से लोग हैरान रह गए। केवल उन्नीस साल की उम्र में सादीओ एक फुटबॉल टीम में खेले। एक साल का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद वह दूसरी टीम में शामिल हो गए। सादीओ ने अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई फुटबॉल मैच खेले हैं। ओलिंपिक गेम्स में भी खेल चुके हैं। कई पुरस्कार जीते हैं। 2016 में प्रीमियर लीग में लिवरपूल ने उन्हें 34 मिलियन पाउंड में साइन कर सभी को चौंका दिया था।
Editorial : घोषणा पत्रों के स्वरूप
सादीओ ने स्वयं अत्यधिक गरीबी में जीवन बिताया है और इसीलिए वे गरीबों के लिए बहुत कुछ करते हैं। वह फुटबॉल मैच खेलने के दौरान मिलने वाले वित्तीय पुरस्कारों में से एक बड़ी रकम दान करते हैं। उन्होंने अपने गांव बम्बली में गरीबों के लिए अस्पताल बनाने के लिए 5 लाख पाउंड का दान दिया है। अपने गांव के विद्यार्थियों को नि:शुल्क लैपटॉप दिये। इसके अलावा ‘सर्वश्रेष्ठ छात्रोंÓ को 400 डॉलर दिए। अपने गांव के लोगों और विद्यार्थियों को लाखों डॉलर के कपड़े और जूते उपहार में दिये। सादीओ अपने गांव के सभी लोगों को हर महीने 70 पाउंड देते है।



