समुद्र में सुरक्षित नौवहन में हाइड्रोग्राफी का उल्लेखनीय योगदान

सम्पूर्ण पृथ्वी पर लगभग 71 फीसदी भाग जल राशियों से पूर्ण होता है। शेष भूमंडल है। जिसमें विश्वकोश के अनुसार 193 देश जिन्हे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हैं। विचारणीय है की कई राष्ट्रों की सीमा में जल राशियों के की अवस्थिति, इन्हे समुद्र तटीय सीमा कहा जाता है। लेकिन समुद्र सीमा का पर्याय पृथक होता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समुद्र की सीमाओं पर कानून और नियंत्रण अधिकार के संदर्भ में सन् 1958 में संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा सम्मेलन में समुद्र के कानून पर पहला  सम्मेलन 86 देशों के प्रतिनिधित्व में हुआ था। इसके पूर्व यानी 24 अक्टूबर 1945 में संयुक्त राष्ट्र के गठन से पहले समुद्र के कानून से संबंधित पहला सम्मेलन 1930 में हेग में आयोजित किया गया था। जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून 1930 के संहिताकरण सम्मेलन कहा गया। यहा सम्मेलन हेग हुआ।यह राष्ट्र संघ द्वारा 13 मार्च और 12 अप्रैल 1930 के बीच शुरू किया गया था और इसमें 47 सरकारों और एक पर्यवेक्षक ने भाग लिया था। सम्मेलन प्रादेशिक जल से संबंधित एक सम्मेलन को अपनाने में असमर्थ था क्योंकि क्षेत्रीय जल की चौड़ाई और निकटवर्ती क्षेत्र की समस्या के सवाल पर कोई समझौता नहीं किया जा सका। हालांकि, प्रादेशिक जल की कानूनी स्थिति, निर्दोष मार्ग के अधिकार और प्रादेशिक जल को मापने के लिए आधार रेखा के संबंध में कुछ समझौते थे।
समुद्र या महा जल राशियाँ सिर्फ पानी और विशालकाय क्षेत्रफल लिए नहीं अपितु अर्थव्यवस्था, यातायात और अनुसंधान के लिए आवश्यक क्षेत्र है। इसे अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण में विश्व बैंक ने परिभाषा करते हुए कहा है कि, ‘नीली अर्थव्यवस्था समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को संरक्षित करते हुए आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और नौकरियों के लिए समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग है।’
यानी इकोनॉमिक लाभ के परिदृश्य में समुद्र पर अपने-अपने वर्चस्व के लिए विभिन्न राष्ट्र अपने हक के लिए लड़ते रहते हैं। जब कोई समुद्री विवाद लंबे समय तक अनसुलझा रहता है या जब इसे निपटाने में लंबा समय लगता है या जब इसे उचित समय के भीतर सुलझाया नहीं जा सकता है, तो इसे एक लंबा समुद्री विवाद माना जाता है। राज्यों के बीच समुद्री सीमा विवाद निपटान एक अंतरराष्ट्रीय घटना है जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कानून पार्टियों को अपने विवाद को निपटाने में मदद करता है यदि वे अपने समझौते से इसका लाभ माँगते हैं। अन्यथा यह किसी विशेष विवादित मुद्दे पर अनायास ही कुछ नहीं कर पाता है। समुद्री मामलों के मामले में, समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, यूएनसीएलओएस सन् 1982 विशिष्ट संहिताकरण है। जिसे सन् 1982 में प्रख्यापित किया गया और जो सन् 1994 में लागू हुआ था।
 2005 सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक कहती है कि, दुनिया में कम से कम हजार सकल रजिस्टर्ड टन के व्यापारी जहाजों की कुल संख्या तीस हजार से अधिक थी। 2010 में 26% की वृद्धि के साथ लगभग 40 हजार हुई है। दिसंबर 2018 तक सभी व्यापारी नाविकों में से एक चौथाई फिलीपींस में पैदा हुए थे। ज्ञातव्य है कि, इन जल या समुद्री मार्ग की निर्धारित रूट के बीना समुद्री यातायात संभव नहीं है। यहां पर जहाजों के निर्धारित रूट और नेविगेशन के निर्धारण की प्रणाली हाइड्रोलाजी के अंतर्गत संभव होता है।
24 जुलाई सन् 1737 को जन्मे अलेक्जेंडर डेलरिम्पल एक स्कॉटिश भूगोलवेत्ता और ब्रिटिश एडमिरल्टी के पहले हाइड्रोग्राफर थे। उन्होंने बताया कि दक्षिण प्रशांत में एक विशाल अनदेखा महाद्वीप मौजूद था, टेरा ऑस्ट्रेलिस इनकॉग्निटो इसके साथ उन्होंने हजारों समुद्री चार्ट तैयार किए। पहली बार समुद्र और महासागरों की एक उल्लेखनीय संख्या का मानचित्रण किया। शिपिंग की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सिद्धांतों ने इस पौराणिक भूमि की खोज में कई अभियानों को प्रेरित किया। वर्तमान दौर में भी हाइड्रोग्राफर हैं जो सटीक मैपिंग, नेविगेशन और अत्याधुनिक अनुप्रयोगों के लिए मैप और आंकड़ों का संकलन करते हैं।
भारत सरकार के मुख्य हाइड्रोग्राफर की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय, देहरादून में स्थित भारतीय नौसेना जल सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालय है। यह सरकार की ओर से भारतीय से संबंधित समुद्री चार्ट के प्रकाशन के लिए जिम्मेदार है। विभिन्न राष्ट्रों में अपने-अपने निर्धारित समुद्री सीमा के संरक्षण, अनुसंधान एवं नियंत्रण में हाइड्रोग्राफर सतत कार्यरत हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा वर्ष 2005 में प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस मनाने प्रस्ताव स्वीकार किया। वर्ष 2006 से प्रथम आयोजन के निरंतर, अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन द्वारा हाइड्रोग्राफर्स के काम और हाइड्रोग्राफी के महत्व एवं वैश्विक स्तर पर ब्लू इकोनॉमी में सहायक भूमिका का उद्योतक है। इस महत्वपूर्ण योगदान को विश्व के सामने लाने के प्रयास में यह दिवस जल सर्वेक्षण एवं जल सर्वेक्षणकर्ताओं को समर्पित किया गया है।
लेखक
पुखराज प्राज
छत्तीसगढ़

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