असहनीय दर्द से मर रहे बेजुबान
The voiceless are dying of unbearable pain

Editorial : चारों धामों के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। बाबा केदार और मां यमुना के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु घोड़े और खच्चरों का इस्तेमाल करते हैं। हर साल चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम में घोड़े और खच्चरों का संचालन किया जाता है। लेकिन घोड़ा-खच्चर संचालक ज्यादा पैसे कमाने के लालच में पशुओं के साथ क्रूरता जैसा व्यवहार करते हैं। जिसके कारण हर साल घोड़े और खच्चरों के मौत के मामले काफी अधिक सामने आते रहे हैं। घोड़ा-खच्चर संचालक इतने निर्दयी हो गए हैं कि पशुओं को समय पर आराम और गर्म पानी तक नहीं देते। इस तपती गर्मी में पशुओं को खाना और गर्म पानी की बहुत जरूरत होती है, पशु तड़ता रहता है, बेजुबान कुछ कह भी नहीं सकता, लेकिन इंसान इतने निर्दयी नासमझ हो गए है कि बेजुबानों की भाषा नहीं सझते। यह कैसी इंसिानियत है कि बेजुबान पशुओं को सताकर आप भगवान के दर्शन के लिए जाते है। घोड़ा-खच्चर संचालक पैसों के लिए पशुओं के साथ क्रूरता व्यवाहार करते हैं और पशुओं को भरपेट खाना और गर्म पानी तक नसीब नहीं हो पाता।
ऐसे में पर्याप्त आराम ना मिलना उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्योंकि ऐसे में भूसा, गुड़ व चना खाते ही जानवरों के पेट में गैस बन रही है। गैस के कारण उनको असहनीय दर्द हो रहा है और उनकी मौत हो रही है।
ये घोड़े और खच्चर श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम तक पहुंचने में मदद करते हैं। ऐसे में इन पर क्रूरता ना करें और अगर कहीं पर इन जानवरों पर क्रूरता होती दिखाई दे तो उसकी रिपोर्ट करना चाहिए। पशु चिकित्सकों और उत्तराखण्ड सरकार को संज्ञान लेना चाहिए कि घोड़े-खच्चरों की बर्बता पर रोक लगे। पशु पर क्रूरता करने वाले घोड़े-खच्चरों के संचालकों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। पशुपालन विभाग को यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों की मौतों को कम करने के लिए कोई खास कदम उठाना चाहिए।



