उत्तराखंड में एक बार फिर पुष्कर राज

उत्तराखंड (Uttrakhand) में एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) पर बीजेपी (BJP) ने भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया है. खुद की खटीमा सीट से विधानसभा चुनाव हार चुके पुष्कर सिंह धामी के पास मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते ही चुनौतियों का पहाड़ होगा. उत्तराखंड में भले ही बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की हो, लेकिन चुनाव में मुख्यमंत्री ही अपनी सीट नहीं बचा सके थे. ऐसे में पुष्कर सिंह धामी के पास सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भरोसे पर कायम रहते हुए अगले पांच साल तक सरकार चलाने की है. बीजेपी के घोषणापत्र के वादे पूरा करना भी बड़ा चैलेंज होगा.

पुलिसकर्मियों के लिए ग्रेड पे में बढ़ोत्तरी की बात हो या फिर सरकारी कर्मचारियों के वेतन में विसंगति का मामला, भू कानून हो या फिर, उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का मुद्दा. पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी नई सरकार के बनते ही बड़ा चैलेंज है. ऐसे में देखना ये होगा कि उत्तराखंड की पहाड़ जैसी इन चुनौतियों का होने वाले सीएम कैसे सामना करते हैं.

पुष्कर सिंह धामी की पिछली कैबिनेट ने शिक्षा मित्रों का मानदेय 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार कर दिया था. हालांकि वो फैसला आचार संहिता के चलते लागू नहीं हो पाया था. अब ऐसे में नई सरकार के आने के बाद मानदेय बढ़ाने के आदेश को लागू करना भी चुनौती है.

उत्तराखंड में पिछले काफी वक्त से भूमि कानून की मांग उठती रही है. हालांकि जमीनी तौर पर इस संबंध में कोई फैसला नहीं किया गया है. पुष्कर सिंह धामी के सामने भूमि कानून को लेकर कोई कदम बढ़ाने का चैलेंज है. राज्य में इस वक्त कोई भी पूंजीपति जितनी चाहे जमीन खरीद सकता है. यहां हिमाचल की तर्ज पर भूमि कानून बनाए जाने की मांग की जा रही है.

नए सीएम के लिए पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे भी बड़ी चुनौती है. सरकार को ग्रेड पे को लेकर बड़ा फैसला करना होगा. पहले बैच के सिपाहियों को 20 साल की सेवा के बाद 4600 ग्रेड पे दिया जाना था. 20 साल पूरे होने पर एक बार फिर ग्रेड पे की मांग शुरू हो गई. धामी सरकार के 2 लाख रुपए एकमुश्त देने के फैसले को पुलिसकर्मियों ने मानने से इनकार कर दिया था. अब नई सरकार को इस पर फैसला लेना होगा.

कर्मचारियों की पेंशन बहाली और वेतन विसंगति का मुद्दा भी उत्तराखंड की नई सरकार के लिए बड़ा चैलेंज होगा. कर्मचारी काफी समय से इसकी मांग करते रहे हैं. राजस्थान सरकार के कर्मचारियों के पेंशन बहाली के फैसले के चलते दबाव बढ़ गया है. ऐसे में नई सरकार को इस मामले पर भी अपना नजरिया स्पष्ट करना होगा.

उत्तराखंड में पिछले दो दशक से गैरसेंण को स्थाई राजधानी बनाने का मुद्दा छाया रहा है. दरअसल उत्तराखंड में देहरादून के अलावा गैरसेंण भी गर्मियो में राजधानी होती है. राजनीतिक दलों ने गैरसेंण को स्थाई राजधानी बनाने का मुद्दा उठाया था. ऐसे में धामी के सामने इसे स्थाई राजधानी बनाना बड़ा चैलेंज होगा. हालांकि इस मुद्दे पर फैसला आसान नहीं होगा.

News Source : ABP Live Hindi

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