Editorial : छठ व्रत की महिमा

Editorial: Glory of Chhath Festival

Editorial : Glory of Chhath Festival
Editorial : Glory of Chhath Festival

Editorial: भारत को सृष्टि ने जहां एक ओर प्रकृति का अणखुट ख़ज़ाना दिया है, तो वहीं कुदरत ने हमारे जाति धर्म की आध्यात्मिक मान्यता को सुरक्षित करके बर$करार रखा है, जो पौराणिक काल से सत्यता का प्रतीक बनीं हुई है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी से चला आ रहा है। इस वर्ष यह व्रत 5 नवंबर से लेकर 8 नवम्बर तक मनाया जायेगा।

छठ पर्व की शुरूआत नहाय-खाय के साथ होती है। इसके दूसरे दिन को खरना कहते हैं। इस दिन व्रती को पूरे दिन व्रत रखना होगा। शाम को व्रतीमहिलाएं खीर का प्रसाद बनाती हैं। छठ व्रत के तीसरे दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं शाम के समय तालाब या नदी में जाकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देती है। चौथे दिन सूर्य देव को जल देकर छठ पर्व का समापन किया जाता है।

इस त्योहार को सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल सहित पूरे विश्व में जहां उत्तर भारतीय निवासी हैं मनाया जाता है। छठ पूजा का पर्व संतान के लिए रखा जाता है। इस व्रत की महिमा अपरम्पार है। जिस किसी ने भी इस व्रत को विश्वास एवं श्रद्धा के साथ किया है। उसकी हर मनोकामना पूर्ण हुई है।

पुत्र, यश, धन प्राप्ति के लिये किये इस व्रत के परिणाम सदैव ही सकरात्मक रहे है। तभी इस व्रत को करने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि ही होती जा रही है। छठ में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।

छठ व्रत अपार महिमा के चलते आज व्रत करने वालों की संख्ष्या में भी अपार वृद्धि होती जा रही है। इस व्रत में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है। इस व्रत में प्रसाद में सारे मौसमी फल, गन्ना, ठेकुआ शामिल होता है। व्रत करने वाला परिवार इस व्रत को आस्था एवं पूर्ण विश्वास से करता है, मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

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