Editorial : कर्ज में मत डुबो

Editorial : आए दिन मीडया में ख़बरें प्रकाशित हो रही हैं कि कर्ज़ न चुकाने के कारण लोगआत्महत्या कर रहे हैं। कई सखबरों में पुरे परिवारने हत्या कर लेने की बात होती है। आजकल कर्ज लेना बहुत आसान बना दिया गया है। ज़रूरत है या नहीं अगर मिल रहा है तो ले लेंगे।
कर्ज तो ले लिया अब वापस कैसे करेंगे यह तो लेने से पहले सोचना चाहिए था। और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी यह जानकारी थी कि इस कर्ज के पैसों का करना क्या है? पर असल खेल और दिक्कत तो तब शुरू होती है जब यह कर्ज देने वाली कंपनियाँ, बैंक वसूली का तकाजा करने लगते हैं तब जाकर लोगों को समझ में आता है कि मैंने कौन सी मुसीबत अपने सर पर लाद ली है!
कर्ज मिलना इतना आसान हो गया है कि मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियों ने भी अब कर्ज देना शुरू कर दिया है।आपरेटर के हफ़्ते में चार बार मैसेज आते हैं कि आपका 9 लाख रूपये का लोन मंज़ूर हो गया आइए और पैसे ले जाइए। आपका च्एबीसी बैंकज् का 5 लाख रुपये की लिमिट का क्रेडिट कार्ड तैयार है, आइए ले जाइए!!!
आज लोगों को खुद को अमीर दिखाने का ऐसा पागलपन सवार है कि लोग दिखावे के लिए किसी भी हद तक जाते हैं और कर्ज लेकर अपने को अमीर दिखाते हैं। अमीरी दिखाने का सबसे आसान और बढ़िया तरीका लोगों को हाथ में आईफोन दिखता है। लेकिन जब एक रपट आई कि भारत में 90 प्रतिशत आईफोन $कज़र् पर खरीदे जाते हैं। जी हाँ भारत के हर 10 में से 9 आईफोन इएमआई यानी किश्तों पर लिए गए हैं!!!
देखिए साहब, कर्ज पर मोबाइल तो ले लेंगे लेकिन अगर आप उससे कोई काम करते हैं उसे आमदनी का ज़रिया बनाते हैं तब तो यह बात किसी हद तक समझ में आती है वर्ना यह निरी बेव$कू$फी के सिवा कुछ नहीं है।
मिसाल के तौर पर इसे ऐसे समझिए कि आप किसी हिल स्टेशन पर या किसी दूसरी जगह पर $फोटोग्रा$फी करते हैं और उससे आपकी आमदनी होती है तब तो $कज़र् पर आईफोन ख़रीदने वाली बात समझ में आती है।
एक उदहारण दे के इस बात को समझते हैं। कल्पना करो आप किसी हिल स्टेशन या किसी पर्यटक जगह पर गए हो। वहां एक फोटोग्राफर आता है आप से कहता है कि मैं पेशेवर फोटोग्राफर हूँ। आप की फोटो बहुत सुन्दर निकालूंगा। ऐसी की जो आप के जीवन भर की याद बन जाएगी।
आप उस से रकम तै करते हो। वह आपको 3,000 रुपये कहता है। मामला 2,500 में तै होता है। अब अगर यह बंदा दिन में केवल दो ग्राहक बी पकड़ ले तो उसे रोज के 5,000 मिलेंगे। अब अगर यह बंदा आई फोन किश्तों पर खरीदे तो उस के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल नहीं होगा।
मोबाइल फोन या कोई भी वस्तु सिर्फ इतनी कीमत की लें कि जो आप कैश में ख़रीद सकते हैं। और इसके लिए आपको अपने एक भी महीने के ज़रूरी खर्चों में कटौती न करनी पड़े। अगर आपके मोबाइल $फोन की कीमत आपकी 1 महीने या इससे ज़्यादा की आमदनी के बराबर या इससे ज़्यादा है तो यकीन जानिए यह फोन आपकी ज़रूरत नहीं सिर्फ दिखावा है।
झूठे दिखावा करने के चक्कर में या कहें कि दोस्तों और रिश्तेदारों पर झूठा रॉब ज़माने के लिए कर्ज़ का फंदा अपने गले में ना डाल लें। यदि आपने ऐसा किया तो किसी का कुछ नहीं बिगड़ना। हाँ, भुगतना आपको और आप के परिवार को पड़ेगा। एक कहावत है कि चादर उतनी ही फैलाएं जितने पैर लम्बे हों।
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हमारे बुज़ुर्गों द्वारा बनाई गई यह कहावतें केवल युहीं नहीं बनाई गई। इन के पीछे उन का कई सालों का अनुभव है। हमने तो आप को आप के मार्ग में आने वाले गढ्ढे बता दिए हैं। अब यह आप पर है कि उन गढ्ढों में गिरें या बच के चलें। सोचना जरूर।



