Editorial : बदलाव के सात साल
Editorial: Seven Years of Change

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होना केवल एक संवैधानिक निर्णय की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि यह उस परिवर्तन यात्रा का भी अवसर है, जिसने देश की राजनीति, प्रशासन, सुरक्षा और विकास संबंधी विमर्श को नई दिशा दी। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारतीय संविधान के दायरे में लाने का निर्णय लिया था। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना, समान अधिकार सुनिश्चित करना और क्षेत्र में विकास की गति तेज करना बताया गया था।
इन सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आधारभूत ढांचे के विकास, सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश देखने को मिला है। कई केंद्रीय योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा है। पर्यटन के क्षेत्र में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों का आगमन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य वंचित वर्गों से जुड़े अनेक केंद्रीय कानूनों और अधिकारों का विस्तार भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा है।
हालांकि, यह तस्वीर पूरी तरह एकरंगी नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बावजूद समय-समय पर आतंकवादी घटनाएं और सीमा पार से घुसपैठ की चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती, रोजगार के अवसरों का विस्तार तथा युवाओं के विश्वास को और मजबूत करने जैसे मुद्दे आज भी नीति-निर्माताओं के सामने महत्वपूर्ण हैं। किसी भी क्षेत्र में स्थायी शांति केवल सुरक्षा उपायों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी, संवाद और समावेशी विकास से सुनिश्चित होती है।
अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर देश में अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण रहे हैं। लोकतंत्र की यही विशेषता है कि महत्वपूर्ण निर्णयों पर मतभेद भी होते हैं और समर्थन भी। ऐसे में आवश्यक है कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों, संवैधानिक मूल्यों और जनहित के आधार पर हो, न कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहे।
Editorial : लोकतंत्र की विश्वसनीयता का आधार
सात वर्षों का यह पड़ाव आत्ममंथन का अवसर भी है। यदि विकास की गति के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं को और सशक्त किया जाए, युवाओं के लिए शिक्षा एवं रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं तथा शांति और विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत किया जाए, तो जम्मू-कश्मीर देश के सर्वाधिक प्रगतिशील क्षेत्रों में स्थान बना सकता है। अंततः किसी भी ऐतिहासिक निर्णय की सफलता का वास्तविक मापदंड यही है कि उससे आम नागरिक के जीवन में सुरक्षा, सम्मान, अवसर और समृद्धि कितनी बढ़ती है।



