Editorial : ये गुजरात किसने बनाया?

Editorial : 1960 को पुराने मुंबई प्रांत को दो भागों में विभाजित करके दो राज्यों का गठन किया गया। एक है महाराष्ट्र और दूसरा है गुजरात। बहुत से लोग नहीं जानते कि एक समय में राजस्थान के एक हिस्से को गुजरात कहा जाता था जो राजपूताना (अब राजस्थान) का एक हिस्सा था और गुजरात का एक हिस्सा था।
गुजरात का अर्थ है सुख और समृद्धि का राज्य। गुजरात का अर्थ है व्यापार का राज्य। व्यापार के क्षेत्र में गुजरात का डंका पूरी दुनिया में बजता था। गांधी जी और सरदार पटेल का गुजरात। विक्रम साराभाई का गुजरात। कन्हाईलाल मुंशी का गुजरात। गुजरात जिसने देश को श्वेत क्रांति (दूध उत्पादन) दी।
दुर्भाग्य से ये सारी बातें इतिहास बन गई हैं। दुर्भाग्य से आज का गुजरात देश और दुनिया भर में बदनाम हो चुका है। गुजरात अपराध से भरा पड़ा है। एक समय था जब बिहार और उत्तर प्रदेश अपराध के लिए जाना जाते थे। आज गुजरात अपराध के मामले में देश के कई राज्यों को पीछे छोड़ चुका है। शायद ही कोई अपराध हो जो गुजरात में न हुआ हो, ना होता हो। कभी प्रगतिशील रहा गुजरात आज पतन के रास्ते पर चला गया है। भ्रूणहत्या, नशीली दवाओं का उत्पादन और व्यापार, युवादुर्भाग्य से आज गुजरात ‘उड़ता गुजरात’ बनता जा रहा है। गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से अब तक अरबों रुपये की ड्रग्स जब्त की जा चुकी है।
गिरफ़्तारी की ख़बरें तो पढ़ने को मिलती है लेकिन उसके बाद क्या हुआ इसकी ख़बर नहीं। कौन पकड़ा गया? पकड़े गए लोगों को कितनी सजा या जुर्माना दिया गया, यह पड़ने को मिलना दुर्लभ है। युवाओं को रोजगार की जगह नशीले पदार्थ दिए जा रहे हैं। शिक्षित बेरोजगार लोग नशे के आदी बन रहे हैं।
इस नशे ने एक समय पंजाब को बर्बाद कर दिया था। पंजाब जैसे हरे-भरे राज्य को ‘उड़ता पंजाब’ का नाम मिला। यह दवा कहां जाती है? ग्रह मंत्री से लेकर पुलिस के आला अधिकारी तक को पता है लेकिन सब खामोश हैं! आठवीं पास गुजरात के गृह मंत्री बोल बच्चन है।
गुजरात में नशे के कारोबार के अलावा और भी कई तरह के आपराधिक कारोबार चल रहे हैं। नकली दवाएँ, नकली इंजेक्शन, कोरोना के दौरान बेची गई नकली दवाएँ, नकली पुलिस स्टेशन, नकली बैंक, नकली डॉक्टर, नकली सरकारी अधिकारी, नकली आईपीएस/आईएएस अधिकारी, फर्जी न्यायलय, विदेशी कंपनियों से फर्जी जॉब लेटर, फर्जी वीजा, फर्जी आईएलटीएस पास करने वाले छात्र कई बार विदेशों में पकड़े गए हैं।
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नकली दूध, दही, पनीर और मिठाइयाँ। गुजरात में ये सब दिन-रात हो रहा है। हां, गुजरात में पुलिस और अन्य एजेंसियां हैं, जिनका काम अपराधियों को पकड़ना और उन्हें सजा देना है। कितने पकड़े गए? कितनों को सज़ा हुई? कितना जुर्माना वसूला गया? भ्रष्टाचारियों से कोई उम्मीद? भूल जाइए। सूरत में मेरा एक दोस्त है। वह एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं। क्षमा करें, नाम नहीं लिख सकता। कई बार जब उस से बातचीत होती है तो इन सब बातों पर चर्चा होती है।
उनका कहना है कि यह राजनेता और उच्च सरकार, पुलिस अधिकारी ही हैं जिन्होंने गुजरात को वह बनाया है जो वह आज है। ये लोग सब कुछ जानते हैं लेकिन ‘हफ्ता’ ने इनके मुंह और आंखों पर पट्टी बांध रखी है। यह तब तक ऐसे ही चलता रहेगा जब तक भ्रष्टासुरों का वध नहीं हो जाता।



