Editorial : बिहार विधानसभा चुनाव-प्रणाली बदलाव की ओर
Editorial: Bihar assembly election system moving towards change

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एक बार फिर लोकतंत्र के पर्व की अनुभूति कराएगा। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की जनता के लिए भी एक सुनहरा अवसर है कि वे अपनी आकांक्षाओं और उम्मीदों के अनुरूप प्रतिनिधि चुन सकें। इस बार की चुनाव प्रणाली, प्रक्रियात्मक पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और मतदाता सहभागिता के दृष्टिकोण से विशेष चर्चा में है।
बिहार की चुनाव प्रणाली वर्षों से कई उतार-चढ़ावों का साक्षी रही है। कभी जातिगत समीकरणों ने तो कभी क्षेत्रीय मुद्दों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है। परंतु 2025 का चुनाव एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ तकनीकी विकास और युवा मतदाताओं की भागीदारी लोकतंत्र को एक नई दिशा दे सकते हैं।
ईवीएम और वीवीपैट का समावेश
चुनाव आयोग ने इस बार भी ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के साथ वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) को अनिवार्य रूप से लागू करने की घोषणा की है। इससे मतदाता को यह विश्वास मिलेगा कि उनका मत सुरक्षित है और कोई भी गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम है।
डिजिटल और जागरूकता अभियान
2025 के चुनावों में सोशल मीडिया, डिजिटल कैम्पेनिंग और ई-वोटर कार्ड जैसी सुविधाओं को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना है। इस बार विशेष ध्यान मतदाता सूची की शुद्धता पर दिया गया है। डुप्लीकेट एंट्री हटाने, मृत मतदाताओं के नाम हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सुलभ बनाया गया है।
बिहार चुनाव प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौती अभी भी ‘पैसे और बाहुबल’ के प्रभाव को खत्म करना है। हालांकि चुनाव आयोग सख्ती से आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। राजनीतिक दलों को अब केवल वादों की राजनीति से आगे बढ़कर कार्यों की राजनीति करनी होगी। जनता अब मुद्दों पर आधारित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के प्रति अधिक सजग है।
Editorial :श्रद्धा-सुरक्षा और समरसता का प्रतीक अमरनाथ यात्रा
चुनावी घोषणापत्र अब केवल औपचारिकता नहीं रह गया, जनता इसे सत्यापन के एक उपकरण के रूप में देखने लगी है। बिहार चुनाव प्रणाली 2025 एक तकनीकी, पारदर्शी और समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ओर बढ़ती हुई प्रतीत हो रही है। बिहार का यह चुनाव न केवल सरकार तय करेगा, बल्कि यह भी दर्शाएगा कि राज्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा – परंपरा के बोझ तले या नवाचार और विकास की ओर।



