Editorial : सफलता के मूल मंत्र

Editorial: Basic mantras of success Feedback Improve your

Editorial: Basic mantras of success
Editorial: Basic mantras of success

रास्ते बदलो पर लक्ष्य नहीं बदलो। कभी-कभी बहुत मेहनत के बाद भी कार्य सिद्ध नहीं हो पाता मगर वही कार्य कम मेहनत में भी सिद्ध हो सकता है, बस आपके पास उसकी तरकीब अथवा तरीका होना चाहिए। संसार में हर जीव अपने आवास और भोजन की व्यवस्था अपने ही तरीके से करता है लेकिन मकड़ियों द्वारा उनका जाल बनाना काफी रोचक और बेहद कठिन है उनसे इन इस कठिन परिस्थितियों में सफलता पाने का गुण सीखना है। हमारे बड़े बुजुर्गों ने हमें बार-बार समझाया है कि देखो, यह चीटी कितनी बार दीवार पर चढ़ते हुए बार-बार गिरती है परंतु फिर उठ खड़ी होकर चढ़ती है। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है। मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना नहीं अखरता है। आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। जीवन संघर्ष का दूसरा नाम हैं। मकड़ी से कारीगरी सीखने की करें तो यह उदाहरण भी हमें हमसे बड़े बुजुर्गों द्वारा पीढ़ियों से, दशकों से दिया जाता है कि देखो वह मकड़ी नें कैसा सुंदर आकार का जाल बनाया है, उसकी कलाकारी को देखो बस हमें आज उस मकड़ी की कला की कारीगरी को आज कौशलता का नाम देकर उसकी कारीगरी को अपने मानवीय मस्तिष्क में यह बात उतारनी है कि जब हम से हजारों गुणा छोटा जीव इतनीं सुंदर कारीगरी कर सकता है तो हम क्यों नही। वर्तमान समय में कौशलता या कारीगरी या हुनर का नाम हम बहुत अधिक सुन रहे हैं। कौशलता विकास का नाम भारत सरकार के करीब-करीब हर मंत्रालय के कार्यक्रम की सूची में है और एक अलग से कौशलता विकास मंत्रालय भी बनाया गया है कुछ हफ्तों से देशभर में हुनर हाटों का आयोजन कर, हर मानव निर्मित कलाओं, वस्तुओं और सेवाओं का प्रदर्शन कर उनका वैश्विक विस्तार करने की रणनीतिक तैयारी की जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button