Editorial:महान अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भारत सरकार ने 27 दिसंबर, 2024 के लिए निर्धारित सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। मनमोहन सिंह का जन्म 1932 में पंजाब में हुआ था। वह 2004 से 2014 तक लगातार दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पहली बार पीएम पद की शपथ ली थी। उन्होंने 2009 से 2014 तक अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। मनमोहन सिंह को सन 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जाना जाता है। मनमोहन सिंह का नाम शीर्ष अर्थशास्त्रियों की फेहरिस्त में सम्मान से लिया जाता रहा है। अगर डॉ मनमोहन सिंह नहीं होते तो वर्ष1991-92 में भारत आर्थिक रूप से अपंग हो गया होता। डॉ मनमोहन सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के साथ मिलकर भारत की आर्थिक दिशा ही बदल दी थी। डॉ मनमोहन सिंह दो बार प्रधानमंत्री ज़रूर बने लेकिन वे कभी भी खुद को राजनेता नहीं मानते थे, पार्टी के आदेश पर जीवन में सि$र्फ एक बार लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। मनमोहन सिंह को बहुत अच्छी तरह से पता था कि उनका राजनीतिक जनाधार नहीं है। डॉ मनमोहन सिंह ने एक दशक अधिक समय तक अभूतपूर्व बढ़ोतरी और विकास का नेतृत्व किया। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में, भारत ने अपने इतिहास में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर देखी, जो औसतन 7.7त्न रही और लगभग दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनी, 1971 में डॉ. मनमोहन सिंह वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में शामिल हुए। आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक नीति के निर्धारण में उनकी भूमिका को सभी ने सराहा है। भारत में इन वर्षों को उनके व्यक्तित्व के अभिन्न अंग के रूप में जाना जाता है। अर्थशास्त्र के जानकार कहते हैं कि डॉ मनमोहन सिंह अगर 1991 में वित्तमंत्री नहीं बने होते तो शायद भारत कभी भी आर्थिक आपातकाल से बाहर नहीं आता।

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