Editorial : किसकी जीत, किसकी हार?
Whose victory, whose defeat?

दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े चुनाव 18वीं लोकसभा चुनाव में जनता ने एक बार फिर चौंका दिया। लोकसभा चुनाव में आए जनादेश ने सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया। वैसे तो इस बार लोकसभा चुनाव के शुरुआती छह चरण में ही पिछली बार के मुकाबले ढाई करोड़ से ज्यादा वोटरों ने मतदान किया था। फिर भी मतदान का प्रतिशत कम रहा। 64 करोड़ 2 लाख मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मत का उपयोग कर अपने प्रतिनिधि को चुना। जनादेश बताता है कि गठबंधन की अहमियत का दौर 10 साल बाद फिर लौट आया है। भाजपा के पास अकेले के बूते अब वह आंकड़ा नहीं है, जिसके सहारे वह अपना एजेंडा आगे बढ़ा सके। केन्द्र में एनडीए की सरकार बनती हुई तो नजर आ रही है, किन्तु सरकार बनाना आसान बिल्कुल नहीं होगा। मतगणना के नतीजे सामने आते ही यह साफ हो गया है कि केन्द्र में सरकार बनाने की चॉबी अचानक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा टीडीपी के नेता चन्द्रबाबू नायडू के हाथ में आ गई है। केन्द्र में एनडीए की सरकार बनेगी या इंडिया गठबंधन जोड़-तोड़ करके सरकार बना लेगा। यह पूरा फैसला नीतीश कुमार तथा चन्द्रबाबू नायडू के अगले कदम पर निर्भर करेगा। इंडी गठबंधन की बात करें तो यह उसकी स्पष्ट जीत कम और बड़ी कामयाबी ज्यादा है। यह गठबंधन 200 का आंकड़ा आसानी से पार कर रहा है। इसके ये सीधे तौर पर मायने हैं कि अगले पांच साल विपक्ष केंद्र की राजनीति में मजबूती से बना रहेगा। अगर भाजपा ही सरकार बनाती है तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हैट्रिक होगी। पीएम मोदी पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद वे ऐसे दूसरे नेता होंगे, जो लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। इंडी गठबंधन की बात करें तो यह उसकी स्पष्ट जीत कम और बड़ी कामयाबी ज्यादा है।



