Editorial : रामनवमी का महत्व
Editorial: Importance of Ram Navami

Editorial : हिन्दू कलेंडर के अनुसार, प्रतिवर्ष रामनवमी का दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के 9वें दिन को माना जाता है इसीलिए इस दिन को चैत्र मास शुक्लपक्ष नवमी भी कहा जाता है। रामनवमी के त्यौहार को 9 दिन तक मनाया जाता है। इन 9 दिनों में रामनवमी मनाने वाले सभी हिन्दू भक्त रामचरितमानस का अखंड पाठ करते हैं और साथ ही मंदिरों और घरों में धार्मिक भजन, कीर्तन और भक्ति गीतों के साथ पूजा आरती की जाती है।
ज्यादातार भक्त रामनवमी के 9 दिनों के प्रथम और अंतिम दिन पूरा दिन ब्रत रखते हैं। रामनवमी एक बहुत ही धार्मिक और पारंपरिक हिन्दू त्यौहार है। इस त्यौहार को पुरे भारत में बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ हिन्दू लोग मनाते हैं। दक्षिण भारत में रामनवमी को कल्यानोत्सवं के नाम से मनाया जाता है।
इसका अर्थ होता है श्री राम और माता सीता का विवाह उत्सव। आखरी दिन में हिन्दू लोग भगवन राम सीता के मूर्तियों का सुन्दर शोभायात्रा होती हैं जिसमें बड़ी मात्र में श्रद्धालु भाग लेता हैं। भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से इस त्यौहार को मनाया जाता है जैसे महाराष्ट्र में रामनवमी को चैत्र नवरात्रि के नाम से मानते हैं, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडू और कर्नाटक में इस दिन को वसंतोसवा के नाम से मनाया जाता है।
रामनवमी का पर्व अयोध्या के रजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र श्री राम के जन्म दिवस की ख़ुशी में मनाया जाता है। दक्षिण भारतीय लोग रामनवमी के दिन को भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह सालगिराह के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी दक्षिण भारतीय मंदिरों को फूलों और लाइट से रोशन कर दिया जाता है। अयोध्या के लोग श्री राम से बहुत खुश थे। वो उस दिन से श्री राम प्रभु के जन्म दिन को बहुत ही धूम-धाम से रामनवमी के नाम से मनाने लगे।हिन्दू लोगों के लिए रामनवमी त्यौहार का बहुत ही बड़ा महत्व है।
कहा जाता है रामनवमी की पूजा करने वाले व्यक्ति के जीवन से सभी बुरी शक्तियां दूर होती हैं और दैवीय शक्ति मिलती है। यह भी कहा जाता है जिस प्रकार विष्णु जी, श्री राम के अवतार में पृत्वी में आए और उन्होंने धरती में पाप और सुरों का संहार किया उसी प्रकार रामनवमी का ब्रत करने वाले लोगों के जीवन का पाप भी दूर हो जाता है। इस दिन को स्वयं को पवित्र करने का त्यौहार भी माना जाता है। रामनवमी का त्यौहार की पूजा सबसे पहले सवेरे सूर्य देव को पानी चढ़ा कर शुरू होता है। कहा जाता है सूर्य देव, भगवान श्री राम के पूर्वज थे।
उनकी पूजा की जाती है ताकि उनसे सर्वोच्च शक्ति का आशीर्वाद मिले। जगह-जगह राम लीला का आयोजन किया जाता है जिसे देखने के लिए आस-पास के सभी लोग इक्कठा होते हैं। इससे लोगों को मन में धार्मिक भावना बढ़ता है और सकारात्मक सोच भी बढ़ता है। भारत में रामनवमी के उत्सव को मानाने के लिए विश्व भर से भक्त इस दिन अयोध्या, सीतामढ़ी, रामेश्वरम, भद्राचलम में जमा होते हैं।



