ग्लोबल विलेज में कदम फूँक-फूँककर रखने की आदत 

पुखराज प्राज
इंटरनेट के तेज पकड़ के साथ नेटवर्क की तीव्रता वाले 4जी-5जी के वर्तमान दौर में हम दुनियाँ के किसी भी कोने में रह रहे हों। लेकिन हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। लगातार सूचनाओं के आदान-प्रदान से लेकर भावनाओं के साझाकरण तक इंटरनेट के सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये होने लगा है। दुनियाँ, इंटरनेट के जाल के आगे लगभग एक छोटे मगर डिजिटल वैश्विक ग्राम के रूप में स्थापित हो गई है। जहाँ भाषा का अवरोध ट्रांसलेशन की पद्धति, समझ के लिए सरलीकरण की प्रक्रिया और नवीनतम खोज के लिए लोगों के द्वारा नित लिखे जा रहे नवीन ब्लाग्स की इबारतें सब कुछ सीखा ही रहीं है। वहीं दूसरी ओर इंटरनेट के लगातार उपयोगिता के लिए सर्विस प्रोवाइडर के रूप में नेटवर्क दाता कंपनियों के डाटा पैकेज के प्लान खरीद कर इंटरनेट से जुड़ा जा सकता है। अब इंटरनेट, के लिए लोगों में एक अवधारणा यह भी है की इंटरनेट के सर्च इंजन लगभग फ्री होते हैं। नो कॉल, वो लॉश,नो पेड ओनली गेट की मानसिकता से थोड़ा परे होकर सोचकर देखे क्या वास्तव में, सबकुछ नि:शुल्क है। सच्चाई के तह तक पहुँचेंगे तो ज्ञान होगा की ये सर्चिंग इंजन आपके डाटा को मार्केटिंग के एनालिसिस करने वाले लोगों तक मोटी रकम के साथ बेचता है। कहने का तात्पर्य है आपके डाटा से अर्थ की सीढ़ी तैयार होती जाती है। जितना ज्यादा डाटा, उतना अधिक मूल्य बनता है। बहरहाल, ये चिंता का विषय तो है, इसके साथ हमारे ग्लोबल विलेज में इसके अलावा भी और भी बड़ी चुनौतियों का आरंभ हो चुका है।
एक साइबर हमला इंटरनेट आधारित आक्रामक पैंतरेबाज़ी है जो कंप्यूटर सूचना प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क के बुनियादी ढांचे या व्यक्तिगत कंप्यूटर उपकरणों को लक्षित करता है। जिससे जिससे एक्सेस की गई पूरी डाटा को जैसे के तैसे कॉपी कर लिया जाता है। जिसका उपयोग सामाजिक, आर्थिक, या वैश्विक पटल पर व्यवधान या क्षति के रूप में होता है। यह साइबर अटैक का मुख्य उद्देश्य है।इसी स्थिति को परिभाषित रूप में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अपनी 2018 की रिपोर्ट में कहती है कि, ‘आक्रामक साइबर क्षमताएं शत्रुतापूर्ण घटनाओं से निपटने की हमारी क्षमता से अधिक तेजी से विकसित हो रही हैं।’
 मई 2000 में, इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स ने RFC 2828 में हमले को इस प्रकार परिभाषित किया, ‘सिस्टम सुरक्षा पर हमला जो एक बुद्धिमान खतरे से उत्पन्न होता है, यानी, एक बुद्धिमान कार्य जो सुरक्षा सेवाओं से बचने और सिस्टम की सुरक्षा नीति का उल्लंघन करने के लिए एक जानबूझकर प्रयास है।’ अगर पूरी दुनिया की बात करें तो साइबर अटैक की वजह से प्रत्येक मिनटों में पूरी दुनिया को 84 करोड़ रुपये का नुकसान होता है और एक शोध के मुताबिक दुनिया में हर 11 सेकेंड में एक साइबर हमला होता है। ये 2019 के मुकाबले दो गुना ज्यादा है और पांच साल पहले से चार गुना ज्यादा है।
हमारे देश में भी आंकड़ों के मुताबिक, एक अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2021 तक सभी राज्यों में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी हुई। औसतन रोजाना हम 100 करोड़ रूपये की चपत बैंकिंग फ्रॉड और साइबर अटैक से हो रहे हैं। ये आंकड़े माथे लकीरें खींचने के लिए काफी हैं। बढ़ती तेज इंटरनेट की सेवाओं के साथ साइबर क्राइम के पैर भी पसरने लगे हैं। बैंकिंग ओटीपी से लेकर, सोशल मीडिया के अकाउंट हैकिंग तक ऐसे हैकर्स की मानसिकता केवल और केवल सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, वैचारिक एवं सांस्कृतिक क्षति पहुचाना हैं।
विश्व दूरसंचार दिवस मनाने की परंपरा 17 मई, 1865 में प्रारंभ की गई। वहीं आधुनिक समय में इसकी शुरुआत 1969 में हुई। इसी के साथ वैश्विक रूप में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके साथ नवम्बर, 2006 में टर्की में आयोजित सम्मेलन में विश्व दूरसंचार के साथ-साथ इस दिवस में सूचना को भी अंगीकृत किया गया। हमें अपनी इंटरनेट का सुरक्षित और प्राइवेसी के लिए खुद को जागरूक बनाना आवश्यक है। तब जाकर सोशल मीडिया और इंटरनेट के साथ तैयार इस ग्लोबल विलेज की अवधारणा से लाभान्वित होंगें।
लेखक : पुखराज प्राज, छत्तीसगढ़

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