अंधेरे से उजाले की ओर…
हम यहाँ बात कर रहे हैं। Ms. Neeru की, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए हर असफलता को पूर्ण तरीके से सफलता में बदल दिया। आइये जानते हैं Ms. Neeru के बारे में। Ms. Neeru पेशे से Counsellor हैं, तथा शिक्षिका के रूप में बच्चों को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा रही हैं। जो हरियाणा व दिल्ली के काफी गाँवों में निशुल्क शिक्षा व Counselling दे चुकी हैं। जिन्होंने दिल्ली विश्लविद्यालय से मानव व्यवहार में स्नातक किया तथा Post Graduation भी Counselling Psychology से किया, जो छात्रा बचपन से ही मेधावी, परिश्रमी, पराक्रमी रही, वह एक Counsellor के रूप में हमारे सामने हैं, जिनकी बहुत कम आयु में शादी हुई, महज 22 साल की उम्र में मिस नीरू की शादी हुई। शादी के बाद का जीवन इनका बहुत कठिनाईयों से भरा रहा।
शादी के बाद हर दिन इन्होंने संघर्ष किया। शादी के बाद पति व ससुराल वालों से, सास, ससुर से कभी सहयोग नहीं मिला। नीरू हमेशा से ही पढ़ाई में अच्छी छात्रा रही, लेकिन सास-ससुर ने हमेशा पढ़ाई का विरोध किया कि घर की बहुओं को पढ़ाई के लिये आजादी नहीं है तथा कई बार पढ़ाई छुड़ाने की कोशिश की मगर नीरू ने कभी हिम्मत नहीं हारी उसने विपरीत हालातों को भी अनुकूल परिस्थितियों में बदल दिया व जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा, पति व सास-ससुर के विरोध करने पर भी नीरू ने पूरे साहस व हिम्मत के साथ अकेले ना सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि जीवन के सफर को भी आगे बढ़ाया।

नीरू के समाज सेवा के फैसले पर किसी घर के सदस्य ने उनका साथ नहीं दिया, बल्कि पति ने भी उनके इस फैसले का विराध किया, इसलिए नीरू ने अपनी जरूरतों को काफी कम किया, ताकि वह पैसे बचा सके तथा उन पैसों से जरूरतमंदो की मदद भी कर सके। हम सभी को नीरू के जीवन से एक सीख प्रेरणा मिलती है, कि हमें जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि नीरू की तरह मेहनती, कर्मठ, पराक्रमी, निडर, व हौसले बुलंद रखने चाहिये, नीरू कभी भी विपरीत हालातों के सामने नहीं झुकी बल्कि हमेशा हिम्मत, साहस हौंसले को कायम रखा और अकेले ना सिर्फ बच्चे को पाल पोस कर बड़ा किया बल्कि बच्चे के साथ-साथ पढ़ाई व घर तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी आगे बढ़ाया, तथा कभी खुद को टूटने बिखरने नहीं दिया आज नीरू उन लाखों करोड़ो युवतियों के लिये रोल मॉडल है, जो शादी के बाद भी पढ़ना चाहती हैं कुछ करना चाहती हैं।
शादी के एक साल बाद मां बनने के बाद ना सिर्फ बच्चे की ज़िम्मेदारी अकेले ली, बल्कि घर, परिवार व बच्चे की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी आगे बढ़ाया। पारिवारिक दबाव में आकर अपनी पढ़ाई को बीच में ही नहीं छोड़ा, अब नीरू का संघर्ष और भी बढ़ चुका, बच्चे की ज़िम्मेदारी नीरू ने अकेले अपने दम पर पूरी की और सास-ससुर व ससुराल के हर एक सदस्य ने नीरू का विरोध किया कि वह बच्चों को निःशुल्क शिक्षा व Counselling दे रही है। मगर नीरू ने Counselling व शिक्षा को ही समाज सेवा समझा तथा इस तरह वह समाज सेविका बनकर हजारों लोगों की समस्याओं से निकाल रही है। इस महिला से हमें सीखने को मिल रहा है कि इतने संघर्षों के बावजूद ससुराल वालों के हर एक सदस्य के विरोध के बावजूद वह न सिर्फ खुद आगे बढ़ी बल्कि बच्चों के लिये भी आवाज़ उठाई, बच्चों को अंधेरों से उजाले की तरफ लेकर आई।
सुसराल वाले हर एक सदस्य ने नीरू का ना सिर्फ विरोध किया, बल्कि मार पिटाई भी खूब करी, ताकि नीरू आगे बढ़ ना सके। ज़्यादातर सास-ससुर, देवर देवरानी साथ मिलकर नीरू को खूब मारते ताकि नीरू के हौंसले और हिम्मत को दबा सके ताकि उसे आगे बढ़ते हुए रोक सके, ताकि उसका समाज सेवा का जज़्बा रोक सके मगर वो चिड़ियाँ सी भरे आसमान में पंख खोलकर लम्बी उड़ान भरने के लिए तैयार थी, और जब उड़ना शुरू किया तो एक खुले आसमान में उड़ती ही चली गई, और सास-ससुर देवर ने खूब पंख काटने की हर एक कोशिश की, मगर वह ना रूकी, ना गलत के आगे झुकी, बल्कि अपने दम पर हालातों से लड़कर ना सिर्फ अपनी शिक्षा पूरी कर के Counsellor, Carrier Counselling Therapist बनी, बल्कि गलत के खिलाफ आवाज़ भी उठाई, तथा ससुराल के हर एक सदस्य ने खूब Domestic Violence की, मगर नीरू ने फिर भी कभी अपने मानसिक संतुलन को नहीं खोया तथा, फिर भी छोटे बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देती रही, तथा Counselling के माध्यम से ना सिर्फ बच्चों को बल्कि औरतों को भी उनके अधिकारों के बारे में बताती रही, ताकि उसकी तरह कोई और औरत ससुराल वालों की घरेलू हिंसा का शिकार ना बन सके।
आज नीरू गाँव-गाँव जाकर खुद Counselling के माध्यम से बच्चों और औरतों को उनके अधिकारों के बारे में बता रही है, तथा Counselling के माध्यम से स्कूल तथा कॉलेज छात्रों के Carrier Confusion को दूर भी कर रही है। कई बार स्कूल व कॉलेज के छात्र Carrier का एक सही फैसला नही कर पाते हैं, तो ऐसे में नीरू ऐसे बच्चों की मदद करती है, सही क्मबपेपवद लेने में, ताकि कैरियर का एक सही फैसला हो सके। नीरू के लिये घर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चे की जिम्मेदारी अकेले उठाना, ये सफर इतना आसान नहीं था, इन्होंने जिन्दगी के पग-पग पर बल्कि हर एक दिन संघर्ष किया, कोई एक दिन ऐसा नहीं जाता था जिस दिन पति व सास-ससुर देवर-देवरानी के ताने ना मिलते हों, कभी ताने दहेज को लेकर, तथा कभी ताने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने व Counselling देने को लेकर सुनने को मिलते थे। तानों के साथ-साथ घरेलू हिंसा का शिकार हर एक दिन होना पड़ता था, फिर भी नीरू ने पूरे साहस हिम्मत के साथ जीवन में आगे बढ़ने का फैसला लिया, और वह आज तक भी नहीं रूकी, व आगे बढ़ते ही जा रही है। इन्होंने विरोध का सामना करते हुए भी हिम्मत को नहीं छोड़ा।
नीरू के समाज सेवा के फैसले पर किसी घर के सदस्य ने उनका साथ नहीं दिया, बल्कि पति ने भी उनके इस फैसले का विराध किया, इसलिए नीरू ने अपनी जरूरतों को काफी कम किया, ताकि वह पैसे बचा सके तथा उन पैसों से जरूरतमंदो की मदद भी कर सके। हम सभी को नीरू के जीवन से एक सीख प्रेरणा मिलती है, कि हमें जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि नीरू की तरह मेहनती, कर्मठ, पराक्रमी, निडर, व हौसले बुलंद रखने चाहिये, नीरू कभी भी विपरीत हालातों के सामने नहीं झुकी बल्कि हमेशा हिम्मत, साहस हौंसले को कायम रखा और अकेले ना सिर्फ बच्चे को पाल पोस कर बड़ा किया बल्कि बच्चे के साथ-साथ पढ़ाई व घर तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी आगे बढ़ाया, तथा कभी खुद को टूटने बिखरने नहीं दिया आज नीरू उन लाखों करोड़ो युवतियों के लिये रोल मॉडल है, जो शादी के बाद भी पढ़ना चाहती हैं कुछ करना चाहती हैं।
तो आइये हम सब मिलकर नीरू के जीवन से प्रेरणा व सीख लें, अच्छाई की।



