मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लांच किया ‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम

*- हम चाहते हैं कि 9वीं के बाद बच्चे को एक ऐसा बड़ा भाई, दोस्त या बहन मिले, जिसके साथ वह सब कुछ साझा कर सके- अरविंद केजरीवाल
*- किस्म-किस्म के दबावों के चलते तनाव में जी रहे बच्चों को मेंटर उससे बाहर निकलने में मदद करेंगे- अरविंद केजरीवाल
*- नौवीं, 10वीं, 11वीं के बच्चों को एक मेंटर की जरूरत होती है, जो कहता है कि मैं हूं न- मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम को लांच किया। इस प्रोग्राम के जरिए 9वीं से 12वीं के बच्चों को अपना करियर संवारने में मेंटर्स की मदद मिलेगी। इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम चाहते हैं कि 9वीं के बाद बच्चे को एक ऐसा बड़ा भाई, दोस्त या बहन मिले, जिसके साथ वह सब कुछ साझा कर सके। दिल्ली के बच्चों के मेंटर केवल दिल्ली के लोग ही नहीं बनेंगे, बल्कि पूरे देश से लोग मेंटर बनेंगे। देश के किसी भी हिस्से में रहने वाला व्यक्ति दिल्ली सरकार के एप पर पंजीकरण कर मेंटर बन सकता है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर आपकी मेहनत से एक बच्चा अपने सपनों को पूरा करता है, तो यह आप राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा काम कर रहे हैं। जब पूरे देश से लोग आकर बच्चों को मेंटर करेंगे, तो हमारा पूरा देश एक परिवार बन जाएगा और धर्म-जाति की सारी दीवारें टूट जाएंगी। एक भारतीय दूसरे भारतीय से अटैच होगा और हम सब लोग एक परिवार और एक टीम की तरह भारत को आगे बढ़ाएंगे।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, आईजीडीटीयूडब्ल्यू, आईआईटी-दिल्ली, डीपीएसआरयू, डीटीयू, एनएसयूटी, डीएसईयू, एयूडी और आईपी विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रिसिंपल सेक्रेटरी शिक्षा, एच. राजेश प्रसाद, शिक्षा निदेशक प्रकाश राज और दिल्ली सरकार के स्कूलों के प्रमुख समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। सर्व प्रथम, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधायक आतिशी समेत अन्य गणमान्यों ने दीप जलाकर ‘देश के मेंटर’ लॉचिंग कार्यक्रम की शुरूआत की।
इस साल प्राइवेट स्कूलों से 2.70 लाख बच्चों ने नाम कटवा का सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है, यह अद्भुत और शानदार है- अरविंद केजरीवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अद्भुत हो रहा है। हमारे दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कुल 16 लाख बच्चे पढ़ा करते थे। कई सालों से यह आंकड़ा लगभग बराबर रहता था। हर साल कुछ बच्चे आते थे और कुछ बच्चे पास आउट होकर चले जाते थे। लेकिन इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 18 लाख 70 हजार बच्चे हो गए हैं। इस साल दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों से 2 लाख 70 हजार बच्चों ने अपने नाम कटवा का सरकारी स्कूलों में भर्ती हुए हैं। यह अद्भुत और शानदार है। अभी तक आजाद भारत के इतिहास में हमने यह तो सुना था कि यहां इतने सरकारी स्कूल बंद हो गए, इस राज्य में इतने सरकारी स्कूलों के बच्चे कम हो गए, लेकिन प्राइवेट स्कूलों से 2 लाख 70 हजार बच्चे अपने नाम कटवा कर अगर सरकारी स्कूलों आए, तो यह अद्भुत ही है। इसके लिए सभी शिक्षक, सभी बच्चों और उनके अभिभावकों को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं। आप लोगों ने कमाल करके दिखा दिया है। आप लोगों ने पूरे देश के अंदर एक रास्ता दिखाया कि अगर नीयत अच्छी हो, तो यह हो सकता है। दिल्ली के शिक्षा के क्षेत्र में गजब की सकारात्मकता और गजब की उर्जा है।
दिल्ली के स्कूलों में बच्चों को बिजनेसमैन बनना सिखाया जा रहा है-अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले हमने देशभक्ति पाठ्यक्रम शुरू किया। पूरे देश के लोग पूछ रहे कि यह देशभक्ति पाठ्यक्रम क्या होता है? क्या देशभक्ति सिखाई जा सकती है? सारा देश कौतूहल वश देख रहा है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अंदर हमने हैप्पीनेस करिकुलम शुरू किया। तो लोग पूछ रहे है कि बच्चों को हैप्पीनेस भी दी जा सकती है क्या? लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प साहब जब अमेरिका से भारत आए थे, तो उनकी धर्मपत्नी दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में हमारी हैप्पीनेस क्लास अटेंड करने के लिए आई थीं। हमारे शिक्षकों के काम की महक अमेरिका के राष्ट्रपति के घर तक पहुंच गई है। एंटरप्रिंयोरशिप क्लासेज चल रही हैं। बच्चों को एंटरप्रिंन्योर बनना, बिजनेसमैन बनना सिखाया जा रहा है।
हम अपने स्कूलों में बच्चों को नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बना रहे हैं- अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे स्कूलों में शिक्षा का काम तीन चीजों के लिए बच्चों को तैयार करने का होता है। पहला, स्कूल या कॉलेज से पास आउट हो जाने के बाद वह अपना पेट पालने लायक तैयार हो, अपने घर का पालन-पोषण कर सके। आज हमारे शिक्षा जगत की सबसे बड़ी समस्या है कि हम बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर में नौकरी के लिए घूमते रहते हैं और नौकरी नहीं मिलती है। हम अपने बच्चों को तैयार कर रहे हैं कि नौकरी ढूंढने वाले नहीं बनना है, बल्कि नौकरी देने वाले बनना है। अपना धंधा, अपना बिजनेस शुरू करेंगे और हम लोगों को नौकरी देंगे। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अंदर यह शिक्षा नौवीं क्लास से शुरू हो जाती है। हमारा दूसरा उद्देश्य है कि हमें बच्चों को अच्छा इंसान बनाना है। हैप्पीनेस क्लास के अंदर बच्चों से मेडिटेशन करवाई जाती है। अच्छी अच्छी बातें बताई जाती हैं। रोज 45 मिनट से 1 घंटे का क्लास होती है। हैप्पीनेस क्लास की मदद से बच्चों को अच्छा इंसान बनना सिखाया जा रहा है। तीसरा उद्देश्य बच्चे को अच्छा नागरिक बनाना है। जो भी बच्चा स्कूल से निकले, वह देश के लिए अच्छा नागरिक हो। देशभक्ति क्लासेज उनको एक अच्छा नागरिक बनाएंगी और उनको कट्टर देशभक्त बनाएंगी।
किस्म-किस्त के दबावों के चलते तनाव में जी रहे बच्चों को मेंटर उससे बाहर निकलने में मदद करेंगे- अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज दिल्ली सरकार के स्कूलों में ‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम को शुरू किया जा रहा है। मुझे बेहद खुशी है। इसका पायलट प्रोजेक्ट बहुत ही सफल रहा। दो-तीन माह पहले हम लोग पायलट प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने वाले मेंटर और मेंटीज दोनों से मिले। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि एक बच्चा, खासकर नौवीं क्लास के बाद जब वह किशोरावस्था में प्रवेश करता है, तो उसके सामने दो सबसे बड़ी जरूरतें होती है। पहला, उसकी भावनात्क व मनोवैज्ञानिक जरूरतें। वह अपनी जिंदगी में बड़ा हो रहा होता है। किशोरावस्था के अंदर उसके ऊपर किस्म-किस्म के दबाव होते हैं। उस पर अपने अभिभावकों, भाई-बहन, पड़ोसियों, क्लास के बच्चों और शिक्षकों के दबाव होते हैं। आज के आधुनिक जिंदगी में वह बच्चा कई सारे दबाव को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। इसलिए हम देखते हैं कि बच्चों के अंदर तनाव और आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हम यह चाहते हैं कि इनको एक ऐसा बड़ा भाई, एक ऐसा दोस्त, एक ऐसी बड़ी बहन मिले, जिसके साथ वह सब कुछ साझा कर सके, जिसके साथ उसको डर न हो कि वह मेरा मजाक उड़ाएगा। जिसके साथ वह सब कुछ अपने दिल की बात कर सके। जब एक आम आदमी या एक बच्चा अपनी दिल की सारी बात किसी को बता देता, तो उसका दिल हल्का हो जाता है। वह उस तनाव में से भी बाहर निकल जाता है। फिर उसको आत्महत्या करने की जरूरत नहीं पड़ती है और वह उस मानसिकता से निकल जाता है।
मेंटर बच्चे को वैल्यू सिस्टम भी देगा और अच्छा नागरिक बनने में मदद करेगा- अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं समझता हूं कि जो भी हमारे मेंटर्स बनेंगे, वो पूरे देश भर से बनेंगे। केवल दिल्ली के बच्चों को केवल दिल्ली के लोग ही मेंटर नहीं करेंगे। हमने यह एप बनाया है, जिसमें देश के किसी भी कोने में बैठा हुआ कोई भी व्यक्ति कह सकता है कि मैं दिल्ली के एक या दो बच्चे को मेंटर करने के लिए तैयार हूं। आपको कुछ नहीं करना है। आपको उस बच्चे को रोज केवल 10 से 15 मिनट ही देने हैं, जितना वह बात करना चाहे। आपको उसके साथ फोन पर बात करनी है और कुछ नहीं करना है। मेंटर को दिल्ली आने की जरूरत नहीं है और कुछ पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है। बच्चों को यह एक इमोशनल जरूरत है। और दूसरी जरूरत है कि 9वीं, 10वीं, 11वीं व 12वीं का बच्चा एक ऐसे मुकाम पर खड़ा होता है, जब उसे यह नहीं पता होता कि मैं जिंदगी में क्या करूं। कई सारे बच्चे होते हैं, जिनके सोचने का और उनका एक्स्पोज़र काफी कम होता है। इसलिए अगर हमें अच्छे मेंटर मिलेंगे, तो वे बच्चों को बता सकते हैं कि वे क्या-क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं। बच्चों से वे कह सकते हैं कि जिंदगी में क्या करना है, यह सोच लो। मेंटर यह भी बता सकता है कि क्या करने के कितने फायदे और नुकसान है। फिर बच्चा तय करेगा कि उसे क्या करना है। उसके बाद मेंटर उसको गाइड करेगा कि कैसे करना है। इस कार्यक्रम से उम्मीद हैं कि वह मेंटर बच्चे को वैल्यू सिस्टम भी देगा। अच्छा नागरिक बनने में भी वह मदद करेगा। अगर बच्चा न गलत रास्ते पर जा रहा है और वह मेंटर से साझा कर रहा है, तो मेंटर उसे रोकेगा और कहेगा कि यह देश के लिए अच्छी बात नहीं है, तुम्हें एक अच्छा इंसान बनना है, देश के लिए अच्छा नागरिक बोलना है। हम उम्मीद करते हैं कि मेंटर से बच्चों को वैल्यू सिस्टम भी मिलेगा।
मुझे उम्मीद है कि सफल होने पर एक दिन यह कार्यक्रम पूरे देश के सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा- अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर एक बच्चा आपकी मेहनत से अच्छा नागरिक बन जाता है और एक बच्चा आपकी मेहनत से अपने सपनों को पूरा करता है, तो यह काम करके आप राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा काम कर रहे हैं। अगर आप इस मेंटरशिप कार्यक्रम के जरिए आप कुछ लोगों को तैयार कर लेते हैं, तो राष्ट्र निर्माण की दिशा में आपने भी अपनी तरफ से उस दीवार के अंदर एक ईंट लगा दी। आप एक बच्चे को तैयार नहीं कर रहे हो, आप देश को तैयार कर रहे हैं। आप देश के विकास के अंदर ठोस तरीके से भागीदारी कर रहे हैं। आप इस कार्यक्रम में जरूरत हिस्सा लीजिए। हम अपने परिवार के अंदर देखते हैं कि एक बड़ा भाई, अपने छोटे भाई या छोटी बहन मेंटर करता है। जब इतने बड़े स्तर के उपर पूरे देश से लोग आकर बच्चों को मेंटर करेंगे, तो हमारा यह पूरा देश एक परिवार बन जाएगा और धर्म-जाति की सारी दीवारें टूट जाएंगी। मेंटल कौन है और किस जाति-धर्म का है, हमें पता भी नहीं होगा। इससे सारे धर्म और जाति की सारी दीवारें टूटेंगी। एक इंसान दूसरे इंसान के साथ अटैच होगा, एक भारतीय दूसरे भारतीय से अटैच होगा और हम सब लोग एक परिवार और एक टीम की तरह भारत को आगे बढ़ाएंगे। मैं समझता हूं कि यह बहुत ही शानदार कार्यक्रम है और अगर यह सफल होता है तो मुझे यह पूरी उम्मीद है कि यह कार्यक्रम पूरे देश के अंदर सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा।
नौवीं, 10वीं, 11वीं के बच्चों को एक मेंटर की जरूरत होती है, जो कहता है कि मैं हूं न- मनीष सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछले छह-सात सालों में दिल्ली की शिक्षा में बहुत कुछ हुआ है। हमारे स्कूलों के परिणाम अच्छे आने लगे हैं। हमारे बच्चे आईआईटी और नीट में जाने लगे हैं। दिल्ली सरकार के स्कूलों में सबकुछ बहुत ही शानदार किया जा रहा है। नौवीं, 10वीं, 11वीं के बच्चों की एक जरूरत होती है कि उन्हें कोई एक व्यक्ति बड़े भाई, बहन या पिता के रूप में मिल जाए, जो बिना अपने सपने को थोपे उसका हाथ थाम ले। उसके लिए कोई कह सके कि पुलिस में जाना है तो कैसे जाओगे। नौवीं, 10वीं, 11वीं के बच्चों को एक मेंटर की जरूरत होती है, जो कहता है कि चिंता न करो, मैं हूं न। मै तुम्हारे साथ खड़ा हूं। जो यह कहता है कि रिसर्च मेरी, आईडियाज मेरे, मदद मेरी, टैलेंट तुम्हारा और मेहनत तुम्हारी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने यह ‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम को लांच किया है।
बच्चों के सपनों को पालने का काम कोई मेंटर करे, उस दिशा में यह कदम उठाया गया है- मनीष सिसोदिया
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि युवाओं को देश के निर्माण के काम में लगाने से बड़ा कोई काम नहीं हो सकता। बच्चों को पढ़ाने का काम शिक्षक कर रहे हैं और उनको पालन का काम अभिभावक कर रहे हैं। आओ, बच्चों के सपनों को पालने का काम कोई मेंटर करे। उस दिशा में यह कदम उठाया गया है। इसका हमने काफी पायलट किया है। प्रिंसिपल और शिक्षकों से अपेक्षा है कि उनकी तरफ से एक मैसेज हर बच्चे को जाना आवश्यक है कि मेंटरशिप कार्यक्रम में जो लोग जुड़ेंगे, वो आपको बहुत मदद करेंगे। दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने बहुत शानदार एप बनाया है। जिस पर मेंटर अपना पंजीकरण कर सकेंगे और उनको उनकी और बच्चे की रूचि और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उस मेंटर को मेंटीज दे दिया जाएगा। अगर आप मेंटर करने के लिए इच्छुक हैं, तो आप रजिस्टर करिए। डिप्टी सीएम ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि इस देश ने आपको बहुत कुछ दिया है और आप भी अपनी सेवाओं से इस देश को बहुत कुछ दे रहे हैं, लेकिन इस देश की अगली पीढ़ी आपसे आपके 10-15 मिनट मांग रही है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप अपनी नौकरी छोड़कर एक बच्चे को पालना शुरू कर दें, उसके करियर में पैसे से मदद कर दीजिए। हम ऐसा नहीं कह रहे हैं। हम बस यही कहना चाहते हैं कि आप अपने ज्ञान और अपनी समझ का एक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अपना छोटा भाई-बहन मानते हुए उसको फोन पर गाइड करने के लिए अपनी स्वीकृति दीजिए। आपको भी लगेगा कि आपने जिंदगी कुछ ठोस किया है और देश की जो बुनियाद है, वह और मजबूत होती चली जाएगी।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बताया मेंटर का महत्व
इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जीवन में एक मेंटर होने के महत्व को बताया। सीएम अरविंद केजरीवाल ने बताया कि में हमेशा डॉक्टर बनना चाहता था। इसके लिए 10वीं के बाद मुझे विषय चुनना था। मुझसे दो साल वरिष्ठ अरविंद पांडेय जी थे और वो आईआईटी खड़गपुर पढ़ने गए थे। छुट्टियों के दौरान एक बार उनसे मेरी मुलाकात हुई और उन्होंने कहा कि तुम्हें डॉक्टर नहीं इंजीनियर बनना चाहिए। उन्होंने जिंदगी में सबसे अच्छा करो। इसके बाद मैंने मेडिकल छोड़ इंजीनियरिंग को चुना था। वही समय मेरी जिंदगी का टर्निंग पाइंट था। इसलिए हर एक की जिंदगी में एक मेंटर का होना जरूरी है। क्योंकि वह हमें बता सकता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
वहीं डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम जहां खड़े होते हैं, वही पर हमें एक मेंटर की जरूरत होती है। लेकिन स्कूल के दौरान इसकी जरूरत कुछ ज्यादा होती है। इस दौरान बच्चों पर बहुत से दबाव होता है और इस दबाव को कम करने के लिए मेंटर का होना जरूरी होता है। मैं भाग्यशाली था कि मेरे पास शिक्षक पिता और एक बड़े भाई थे और उन्होंने मुझे काफी मोटिवेट किया। मुझे तो बड़े भाई मिले, लेकिन हर बच्चे को बड़ा भाई या बड़ी बहन मिले, इसलिए हमने यह मेंटर प्रोग्राम सभी स्कूलों में शुरू किया है। इसके अलावा, इस दौरान कई गणमान्यों ने मेंटर के महत्व के बारे में बताया। साथ ही, वहां मौजूद बच्चों के साथ वार्तालाप भी की।
‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम के बारे में
दिल्ली सरकार के स्कूलों में कक्षा 9-12 में लगभग 9 लाख छात्र नामांकित हैं। इन छात्रों को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए शिक्षा निदेशालय की तरफ से ‘यूथ फॉर एजुकेशन’ प्रोग्राम के तहत ‘देश के मेंटर’ पहल को विकसित किया गया है। ‘देश के मेंटर्स’ भारत में कहीं से भी स्वयंसेवी युवा होंगे, जो हमारे स्कूलों के युवा छात्रों का मार्ग दर्शन करेंगे और एक बड़े भाई या बहन की तरह उनका सहयोग करेंगे। यह मेंटर्स, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) द्वारा दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के साथ मिलकर बनाए गए एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपना नामांकन करा सकेंगे। मेंटर्स और मेंटीज़ के बीच जुड़ाव की प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है और अब दिल्ली सरकार के सभी स्कूलों में लॉन्च कर दिया गया है।
‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम का उद्देश्य एवं जरूरत-
शिक्षा से ही सच्चा राष्ट्र निर्माण होगा। देश के मेंटर का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को एक साथ लाना है। वे स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का मार्गदर्शन और मार्गदर्शन करेंगे और हमारे देश के लिए एक बेहतर कल बनाने में मदद करेंगे। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नौवीं-बारहवीं कक्षाओं में करीब 10 लाख छात्र पढ़ रहे हैं। और जैसा कि देखा गया है, उनमें से कई पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं। उनके पास अपने सपनों को हासिल करने की क्षमता है, लेकिन मार्गदर्शन और सहयोग की कमी है, जो उन्हें और अधिक समझने और अपने सपनों पर अधिक स्पष्टता देने में मदद करेगी। उन्हें मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जो उन्हें अधिक जानकारी और आत्मविश्वास प्रदान करे, ताकि वे अपने सपनों को प्राप्त कर सकें। दिल्ली सरकार द्वारा यूथ फॉर एजुकेशन के तहत ‘देश के मेंटर’ की परिकल्पना की गई है कि नौवीं-बारहवीं कक्षा में दिल्ली सरकार के स्कूल के सभी छात्रों को मेंटरशिप और मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जो उन्हें विविध करियर और जीवन विकल्पों का पता लगाने में मदद करेगा।
*इस प्रोग्राम का लक्ष्य-*
दिल्ली सरकार ने शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण नींव स्थापित करने के लिए अथक प्रयास किया है। बुनियादी ढांचे और पाठ्यचर्या में बदलाव ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में छात्रों को अवसरों के साथ एक उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया है। दिल्ली की शिक्षा क्रांति के विजन में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए, दिल्ली सरकार युवाओं को राष्ट्र निर्माण के काम में शामिल करने के लिए देश में सबसे बड़ा मेंटरशिप प्रोग्राम की शुरूआत की है। ‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम के तहत, नौंवी से बारहवीं में पढ़ने वाले 10 लाख छात्र कैरियर की खोज कर सकेंगे। इन छात्रों को मार्गदर्शन करने में मदद करने के लिए, दिल्ली सरकार का लक्ष्य युवा स्वयंसेवकों का एक आंदोलन बनाना है, जो इनके लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगे।
‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम की डिज़ाइन
यह प्रोग्राम 2 से 6 महीने का होगा, जिसमें पहले 2 महीने अनिवार्य मॉड्यूल के रूप में और बाकी 4 महीने वैकल्पिक के रूप में होते हैं। 18-35 वर्ष की आयु के बीच विभिन्न पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के मेंटर्स, दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले 2-5 छात्रों का मार्गदर्शन और समर्थन करेंगे। वे विभिन्न क्षेत्रों में अपने ज्ञान, कौशल और विशेषज्ञता को साझा करके छात्रों को उनके समग्र विकास और व्यक्तित्व विकास में मदद करेंगे। मेंटर्स नियमित रूप से उनके साथ बातचीत करेंगे। वे एक-दूसरे के बारे में जानेंगे और करियर विकल्पों के बारे में और अधिक समझ पैदा करेंगे।
केजरीवाल सरकार ने समाजसेवी सोनू सूद को बनाया है ‘देश के मेंटर’ का ब्रांड एंबेसडर
केजरीवाल सरकार ने प्रसिद्ध समाजसेवी एवं फिल्म अभिनेता सोनू सूद को अपने ‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। ‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम के जरिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को ‘मेंटर’ खोजने में मदद मिलेगी, जो उनकी प्रतिभा को उभारने में मदद करेंगे। इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए अपना नाम दर्ज कराने वाले मेंटर्स द्वारा बच्चों को उनके करियर से संबंधित सवालों के जवाब दिया जाएंगे। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों को बदलने के लिए बहुत मेहनत की है और अब सरकार शिक्षा को जन क्रांति बनाना चाहती है। केजरीवाल सरकार का मानना है कि जब देश भर के युवा शिक्षा क्रांति से जुड़ेंगे, तो भारत को वैश्विक लीडर बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।

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