Editorial : शिक्षा और अनुभव

Editorial: Education and Experience

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Editorial : शिक्षा अक्ल को और तेज बनाती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि जो काम शिक्षित नहीं कर सकते वह काम एक अशिक्षित या कम शिक्षित कर देता है। बड़े बुज़ुर्ग सैदेव कहते आए हैं कि अनुभव सब से बड़ा गुरु होता है। कई बार सुशिक्षित लोग भी किसी अनुभवी के सामने पानी कम चाय बन जाते हैं। वह सीख यह है कि किसी को कम मत समझो।

मतलब दुसरे शब्दों में कहें तो किताब का कवर देख कर किताब कितनी अच्छी है या सामान्य है इस बात का निर्णय न करें। किसी के कपड़ों या मकान को देख कर किसी व्यक्ति के बारे में कोई राय ना बनाए। आज की बात एक इंजिनियर, एक पेंटर, गरज मालिक और एक वॉचमैन की है।

एक धनि व्यक्ति कार खरीद ने के बाद एक गराज मालिक को उसे उस कार में क्या, क्या बदलाव लाना है वह कहा। गराज मालिकने ग्राहक की इच्छा को अच्छी तरह अपने कंप्यूटर में लिख लिया। ग्राहक ने एडवांस पैसे भी दिए। गराज मालिक ने उस से एक महीने का समय माँगा। उस गराज में एक ऑटोमोबाइल इंजिनियर भी काम करता था।

ग्राहक के इच्छनुसार कार बन कर तैयार हो गई। कार देख कर बहुत खुश हो गया। कार की ऊंचाई केवल एक या दो इंच कुछ ज्यादा थी। गराज का दरवाजा साइज़ में छोटा था। कार दरवाजे से बहार अगर ले जाया जाती तो उसे नुकसान होना तय था। वॉचमेनने कहा कि सवाल केवल एक या दो इंच की ऊंचाई का है।

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कार एक या दो इंच ऊँची बन गई है। यह तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है। ऐसा करो कार के चारों टायरों कि हवा निकाल दो। कार की ऊंचाई कम हो जाएगी। जब कार गराज से बाहर आ जाए तब दोबारा टायरों में हवा भर देना। ना कार को न दरवाजे को कोई नुकसान पहुंचेगा।

वॉचमेन की बात सुन कर सब अचम्भे में पड़ गए। कमाल है। इतना अच्छा सुझाव हमें क्यों सुझाई नहीं दिया? कई बार शिक्षा से अधिक महत्व अनुभव का होता होता है। पर इस का यह मतलब नहीं कि पढाई नहीं करनी चाहिए। शिक्षा का अपना महत्त्व है।

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