Editorial : स्वतंत्रता संग्राम के महानायक
Editorial : Legends of freedom struggle

Editorial : नेताजी के रूप में लोकप्रिय सुभाष चंद्र बोस एक प्रखर राष्ट्रवादी, एक प्रभावी वक्ता, एक कुशल संगठनकर्ता, एक विद्रोही देशभक्त और भारतीय इतिहास के सबसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी की विचारधारा और व्यक्तित्व के बारे में कई व्याख्याएं उपलब्ध हैं लेकिन अधिकांश विद्वानों का मानना है कि हिंदू आध्यात्मिकता ने उनके व्यस्क जीवन के दौरान उनके राजनीतिक और सामाजिक विचारों का आवश्यक हिस्सा बनाया, हालांकि इसमें कट्टरता या रूढ़िवाद की भावना नहीं थी।
नेताजी की स्पष्ट सोच थी कि स्वतंत्र भारत, सार्वभौम संप्रभुता युक्त शक्तिशाली और विश्ववंद्य होना चाहिये तथा सदियो तक पुन:परतंत्रता न आये, ऐसे प्रयास राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने के साथ ही प्रारम्भ होने चाहिए और इसीलिए भारत के नागरिकों में राष्ट्रीयता का भाव जगाना चाहिए। नेताजी भारतीय इतिहास में अपने समय के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे। वह असीम देशभक्त और भारत के विकास और भविष्य के बारे में अत्यंत कृतसंकल्प थे।
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को बंगाल प्रांत के कटक, उड़ीसा संभाग में प्रभावती दत्त बोस और अधिवक्ता जानकीनाथ बोस के एक बंगाली कायस्थ परिवार हुआ था। भविष्य दृष्टा और राजनीतिज्ञ होने के नाते नेताजी का विश्वास था कि राष्ट्र जागरण और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रियाओ को साथ लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
नेताजी की स्पष्ट सोच थी कि स्वतंत्र भारत, सार्वभौम संप्रभुता युक्त शक्तिशाली और विश्ववंद्य होना चाहिये तथा सदियो तक पुन:परतंत्रता न आये, ऐसे प्रयास राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने के साथ ही प्रारम्भ होने चाहिए और इसीलिए भारत के नागरिकों में राष्ट्रीयता का भाव जगाना चाहिए।
वर्ष 1927 में नेताजी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए कांग्रेस के साथ काम किया, लेकिन समय के साथ कांग्रेस में उपजी गुटबाजी और गांधी जी के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण वह कांग्रेस से अलग हो गए और एक स्वतंत्र संगठन के माध्यम से ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम लड़ा।



