योद्धा दरियाव सिंह पर जाति-विवाद का पर्दाफाश

Caste dispute exposed on Warrior Dariyav Singh

नई दिल्ली/फतेहपुर। बीते कुछ दिनों से जनपद में 1857 के अमर शहीद योद्धा दरियाव सिंह (Amar Shaheed Warrior Dariyav Singh) पर जो विवाद गरमाया हुआ है, बुधवार को उसका पर्दाफाश हो गया है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र की ओर से बुधवार को एक पत्र जारी करके इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया गया है और इसी के साथ ही शहीद की जाति पर संशय भी खत्म हो गया है।

दरअसल, बीते माह 19 नवम्बर को इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एक प्रदर्शनी लगाई गयी थी। इसमें जनपद के अमर शहीद योद्धा दरियाव सिंह लोधी का प्रमुखता से जिक्र किया गया था। मालूम हो कि ये ऐसा पहला मौका था, जब सत्तावनवीं क्रान्ति में जनपद का नेतृत्व करने वाले क्रान्तिकारी दरियाव सिंह का मुख्यधारा के इतने बड़े मंच पर उल्लेख किया गया।

बहरहाल, इधर संस्कृति मंत्रालय द्वारा दरियाव सिंह लोधी के उल्लेख पर खागा की दरियाव सिंह स्मारक समिति के मंत्री राम प्रताप अमीन और अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह ने आपत्ति जताते हुए इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र को यह बताया कि दरियाव सिंह लोध जाति के नहीं थे। इस वास्ते ये लोग 30 नवम्बर को दिल्ली जाकर कला-केन्द्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय से मिले और उनसे दरियाव सिंह के बारे में लोध जाति का उल्लेख करने पर आपत्ति जताई। श्री राय ने समिति के लोगों की बातें सुनी और कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों की जाँच करेंगे और यदि सच पाया गया तो परिवर्तन करेंगे। इसके बाद समिति के लोगों ने जनपद वापस आकर राम प्रताप के हवाले से तमाम समाचार-पत्रों में यह झूठी खबर प्रकाशित करवा दी कि संस्कृति मंत्रालय ने योद्धा दरियाव सिंह को लोध जाति का मानने से इनकार किया है। इतना ही नहीं, समिति ने गुमराह करने के लिए यह भी छपवाया कि कला-केन्द्र ने अंग्रेजों द्वारा लिखित इतिहास को भी झूठा कहा।

जनपद में प्रकाशित उक्त आपत्तिजनक खबरों के हवाले से ग्वालियर निवासी इतिहासकार डॉ. यशपाल सिंह नरवरिया ने इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र को पत्र लिखकर इस पर स्पष्टीकरण माँगा, जिसका बुधवार को जवाब देते हुये संस्कृति मंत्रालय के कला-केन्द्र ने यह स्पष्ट किया कि खागा की दरियाव सिंह समिति का उनके साथ कोई पत्राचार हुआ ही नहीं है। हमने अपनी प्रदर्शनी के दौरान ठा. दरियाव सिंह के साथ जो लोधी का उल्लेख किया था वह ऐतिहासिक साक्ष्य के आधार पर ही किया गया था और वही ऐतिहासिक सच है।

कला-केन्द्र ने यह भी स्पष्ट कहा कि बीते 4 दिसम्बर को जनपद में समिति द्वारा जो समाचार अखबारों में छपवाया गया था, वह समिति ने अपने विवेक से ही छपवाया था। इस सम्बन्ध में मंत्रालय की ओर से समिति को कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया। इससे साफ है कि संस्कृति मंत्रालय ने जो दरियाव सिंह लोधी लिखा था वही सच है और सच्चे इतिहास को ही सभी को मानना चाहिए। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र ने यह भी कहा कि वह अमर शहीदों का सम्मान करती है और इस सन्दर्भ में किसी भी प्रकार की ऐतिहासिक छेड़छाड़ गलत है।

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