आपदा है जहां एनडीआरएफ है वहां

There is disaster where there is NDRF
There is disaster where there is NDRF

19 जनवरी की तारीख देश के लिए बेहद खास है। आज के दिन को देश में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी आम भाषा में ‘एनडीआरएफ’ स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।अनेक समय पर जब भी देश के भीतर कोई भी प्राकृतिक आपदा या संकट की परिस्थिति आती है, तब एनडीआरएफ की महत्वता सबसे अधिक होती है। एनडीआरएफ ने समय-समय पर इसे सिद्ध भी किया है।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल स्थापना दिवस 2006 में अपनी स्थापना के बाद से हर साल 19 जनवरी को मनाया जाता है। विशेष टास्क फोर्स का गठन एक खतरनाक आपदा की स्थिति या आपदा के लिए विशेष प्रतिक्रिया के लिए किया गया है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) NDRF की मूल संस्था है। एनडीआरएफ की कुल 16 बटालियन हैं जो देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जरूरतों को पूरा करती हैं और लगभग 13,000 कर्मचारी देश की सुरक्षा के लिए काम करते हैं।

एनडीआरएफ दुनिया का पहला समर्पित स्टैंड-अलोन आपदा प्रतिक्रिया बल है, एक बहु कुशल और उच्च तकनीक वाला संगठन है जो पूरी तरह से सुसज्जित खोज और बचाव और विशेष सीबीआरएन प्रतिक्रिया टीमों के साथ सभी प्रकार की प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं का प्रभावी ढंग से जवाब देता है।

इसकी स्थापना का उद्देश्य आपदा या संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए जान-माल की सुरक्षा करना होता है। इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण जागरूकता आदि के क्षेत्र में भी एनडीआरएफ सहायता कर रहा है।

एनडीआरएफ की उपलब्धियां :

2006 में अपनी स्थापना के बाद से, एनडीआरएफ ने किसी भी आपदा में त्वरित प्रतिक्रिया और सहायता प्रदान करके खुद को देश के एक कुशल बल के रूप में साबित किया है।

2010 – जनवरी में बेल्लारी (कर्नाटक) में एक छह मंजिला इमारत ढह गई। एनडीआरएफ ने एक सुनियोजित तरीके से सात दिनों तक चले चौबीस घंटे के ऑपरेशन में फंसे हुए 20 जीवित पीड़ितों को बचाया और 29 शवों को निकाला।

2011 – मार्च-अप्रैल में जापान में तिहरी आपदा के जवाब में एनडीआरएफ के 46 कर्मियों द्वारा प्रदान की गई उत्कृष्ट
सेवाओं ने एनडीआरएफ पुरस्कार जीता।

2012 – अप्रैल में जालंधर (पंजाब) में एक बहुमंजिला फैक्ट्री इमारत ढहने की घटना में एनडीआरएफ ने मलबे के भारी मलबे में दबे 12 जीवित पीड़ितों को सफलतापूर्वक बचाया और 19 शव भी बरामद किए।

2013 – जब साइक्लोन फैलिन आंध्र प्रदेश और ओडिशा राज्यों से टकराया, तो लोगों को निकालने के लिए NDRF की बटालियनों को तैनात किया गया।

2014 – अक्टूबर 2014 में जब चक्रवात हुद-हुद ने पूर्वी भारतीय तट पर दस्तक दी, तो प्रभावित लोगों की जान बचाने के लिए NDRF के जवानों को तैनात किया गया। वे बड़े पेड़ों और अन्य धातु की वस्तुओं को काटने के लिए आरी कटर का इस्तेमाल करते थे, जो हुद-हुद की प्रचंड हवाओं से उखड़ कर बिखर जाते थे।

2015 – 25 अप्रैल को, जब नेपाल में 7.8 की तीव्रता और 15 किमी की गहराई वाला भूकंप आया, तो भारत का राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल सबसे पहले जमीन पर था। बचाव कार्यों में एनडीआरएफ के कर्मियों ने कुल 16 पीड़ितों में से 11 जीवित पीड़ितों को बाहर निकाला।

2015 के बाद के भाग में, NDRF ने हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर सुरंग दुर्घटना में बचाव अभियान चलाया जब दो
श्रमिक नौ दिनों तक फंसे रहे। निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

दिसंबर के महीने में, अभूतपूर्व बारिश से तमिलनाडु और पुदुचेरी के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई, जिसके परिणामस्वरूप चेन्नई और इसके उपनगरों में शहरी बाढ़ आ गई। एनडीआरएफ की समय पर प्रतिक्रिया ने 14,000 से अधिक बाढ़ प्रभावित लोगों को निकालने में मदद की। एनडीआरएफ की टीमों ने हजारों जरूरतमंद लोगों को तत्काल राहत और चिकित्सा देखभाल प्रदान करके स्थानीय प्रशासन की भी मदद की।

2019 – एनडीआरएफ की कम से कम 58 टीमों को अगस्त में बाढ़ के दौरान केरल में प्रतिनियुक्त किया गया था, जो
किसी एक राज्य में एनडीआरएफ की स्थापना के बाद से अब तक की सबसे अधिक तैनाती है।इसके अतिरिक्त कोरोना वायरस महामारी से लड़ने में भी एनडीआरएफ ने अहम् भूमिका निभाई है।अभी वर्तमान में जोशीमठ में भूस्खलन की आपदा के समय भी एनडीआरएफ की टीम वहां के लोगों को बचाने का कार्य युद्ध स्तर पर कर रही है।
ये एनडीआरएफ की वीरता के कुछ उदाहरण हैं। इस मानवीय बल ने जीवन और आजीविका को बचाने और समुदायों को किसी भी आपदा के लिए तैयार करने में पेशेवर रूप से प्रतिक्रिया दी है।

एनडीआरएफ के अभियान से 51 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ है। एनडीआरएफ के अधिकारियों की मानें तो आपदा से परे शांतिकाल में बल ने 5,268 सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम किए। इससे 51 लाख 75 हजार 537 लोग लाभान्वित हुए। स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 1524 कार्यक्रम किए गए जिसमें 6,44,225 छात्र-छात्राओं ने आपदा आने की स्थिति में इससे निपटने के गुर सीखे। इसी तरह 1,687 आपदा परिचय कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा 1,714 से अधिक कृत्रिम अभ्यास ‘मॉक एक्सरसाइज’ आयोजित किए गए, जिसमें 8 लाख से ज्यादा लोगों ने आपदा से निपटने के गुर सीखे। विशेषज्ञों का कहना है कि आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनसे पैदा होने वाले संकट को रोका जा सकता है।

उपरोक्त ऑपरेशन करने के अलावा एनडीआरएफ समाज के हर तबके को आपदा से लड़ने में सक्षम बनाने के लिए भी काम कर रही है। एनडीआरएफ जवान स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कर्मचारी, पुलिस, स्थानीय लोग, प्रशासन के आदि लोगों के बीच जन जागरूकता कार्यक्रम चलाकर आपदा से लड़ने के गुर सिखा रहे है, जिससे किसी भी आपातकाल स्थिति में लोग मदद पहुंचने तक खुद और बाकी फंसे लोगों को बचा सकें। एनडीआरएफ आपदा की हर स्थिति से निपटने के लिए हमेशा हर समय तैयार रहती है और अपने आदर्श वाक्य ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ को सार्थक कर रही है।

एनडीआरएफ अन्य देशों में के सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग देती है। बीते कुछ सालों मे सार्क क्षेत्र में आपदा प्रबंधन कर्मियों की ट्रेनिंग का केंद्र भी बना है। एनडीआरएफ वैश्विक स्तर पर अग्रणी आपदा प्रबंधन बल के रूप में उभरा है। मानव जीवन और राष्ट्रीय संपत्ति को बचाने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में आई किसी भी तरह की आपदा से निपटने में यह बल हमेशा अगृणी रहा है।

इस प्रकार यह कहना सार्थक होगा कि जहां-जहां प्राकृतिक आपदाएं नजर आती है वह वहां एनडीआरएफ सेवा के
लिए,लोगों को बचाने के लिए सदैव – सर्वत्र उपस्थित रहकर लोगों की जान बचाने का कार्य निरंतर करती रहती है।
डॉ.पवन शर्मा

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