विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को दी गई नि:शुल्क परामर्श एवं जानकारी 

# यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी के एमडी डॉ पी एन अरोड़ा ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन

फोटोकैप्शन:- अपने चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों के साथ हॉस्पिटल के एमडी डॉ पी एन अरोड़ा।
गाजियाबाद। विश्व भर में प्रति वर्ष 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को नि:शुल्क परामर्श एवं जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में 100 से भी ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पी एन अरोड़ा ने किया और उन्होंने सभी फिजियोथेरेपिस्ट को आज के दिवस की हार्दिक बधाई दी और मरीजों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
इस अवसर पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी (Yashoda Super Specialty Hospital)  के फिजियोथेरेपी विभाग के प्रमुख एवं वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट मुबारक हुसैन ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस बीमारी में हड्डियों का गलना प्रारंभ हो जाता है, यह बीमारी ज्यादातर मोटापे से ग्रसित लोगों में ज्यादा कुप्रभाव दिखाती है। शरीर के बड़े जोड़ों में ऑस्टियोआर्थराइटिस की बीमारी ज्यादा देखी जाती है, जैसे कूल्हे का जोड़, घुटनों का जोड़ आदि।
फिजियोथैरेपिस्ट मुबारक हुसैन ने बताया कि इस बीमारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हमें यह 3 से 4 साल पहले ही अपने लक्षण दिखाने शुरू कर देती है। ऐसे में इसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जॉइंट या जोड़ में दर्द शुरू हो जाता है और उसमें सूजन भी आ सकती है। साथ में जोड़ों से संबंधित अंगों का रेंज ऑफ मोशन या उनके मुड़ने में कमी हो जाती है। मरीज का चलना फिरना भी कम होने लगता है और उसके जोड़ पूरी तरह से मुड़ नहीं पाते।
हॉस्पिटल के दूसरे वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट आशीष जैन ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस की बीमारी 50 साल से अधिक के मरीजों में ज्यादा देखी जाती है। वहीं, वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट स्नेहा जैन ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस बीमारी से बचने के लिए मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज या व्यायाम करने चाहिए। मांसपेशियों के व्यायाम यदि व्यक्ति नियमित रूप से करता रहे तो ओस्टियोआर्थराइटिस से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि आपको पहले से इनमें से कोई बीमारी है तो अपने ट्रीटिंग फिजिशियन से बात करके ही यह व्यायाम शुरू करें और समस्या बढ़ने पर कुशल एवं प्रशिक्षित फिजियोथैरेपिस्ट की राय जरूर लें।

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