मोदी के ध्यान पर बवाल

Uproar over Modi's attention

The whole world's eyes are on the vote counting

18वें लोक सभा चुनाव 2०२4 के सातवें व अन्तिम चरण के चुनाव सम्पन्न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कन्या कुमारी स्थिति स्वामी विवेकानंद शिला पर 45 घंटे ध्यान पर बैठ गए। मोदी के ध्यान पर विपक्ष ने मचाया बवाल है। कांग्रेस का कहना है कि ये चुनाव आचार संहिता का सीधा-उल्लंघन है। मोदी के ध्यान से सियासी मायने निकाले जाने लगे। राजनीतिज्ञों का कहना है कि राजनीति व सियासत हर समय अपने रंग-ढंग बदलती रहती है। इस बार के लोकसभा चुनाव में यह बात सटीक बैठती हुई दिखी रही है।

पहले चुनाव में जो लड़ाई जमीन पर लड़ी जाती है, जनता के मु्द्दों पर लड़ी जाती है खास कर 2014 से वह लड़ाई अब मंदिर, मस्जिद, हिंदू, मुसलमान होते हुए स्वयं भू परमात्मा व उनके विशेष दूत तक पहुंच गई है।

मोदी जी देश की 140 करोड़ जनता की सेवा करने के लिए नर रूप नारायण अवतरित हुए हैं। भाजपाई नेताओं ने माना है कि पीएम मोदी एकदम भगवान की तरह हैं। वह एक अवतार हैं।

यदि वो तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे तो उसके लिए पोजिशनिंग कर रहे हो। क्योंकि ये लगभग माना जा रहा है कि वो एनडीए गंठबंधन निकाल लेंगे। अब राष्ट्रपति तो वो नहीं बनेंगे और राष्ट्रपिता की पद खाली नहीं है। तो ऐसे में राष्ट्रप्रभु या राष्ट्र परमात्मा की जगह खाली बचती है। देश में एक बहुत बड़ा वोट बैंक हिंदूओं का है, जो संतों और भगवान में बहुत विश्वास रखता है। जो राम मंदिर का श्रेय मोदी को देता है। वही दूसरी ओर विपक्षी राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल ममता आदि जैसे नेता उनकी इस बात का पूरा मखौल उड़ा रहे हैं। लैकिन इससे मोदी के वोटरों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

जहाँ तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ध्यान का प्रशन है। तो हमसब भारत जैसी पवित्र भुमि में पैदा हुए है। जिस घरती पर-राम कृष्ण, नानक, बुद्ध-महाबीर, कबीर आदि महान संतो ऋषि मुनियो ने जन्म ही नहीं लिया बल्कि ध्यान का मार्ग अपना कर अमर हुए बल्कि मानव जाति को जीवन जीने के गरु रहस्यो सें अवगत कराया है। ध्यान साधना तो हम सभी को प्रत्येक दिन करना चाहिए, साधना व ध्यान से नई ऊर्जा -नई स्पपूर्णा नई उंमग हमें मिलती है।

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