आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी सीख स्वास्थ्य क्षेत्र ने दी: मोदी

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में स्वास्थ्य क्षेत्र में किये गये प्रयासों की सराहना करते हुए शनिवार को कहा कि कोरोना के इस संकट काल में आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी सीख इसी क्षेत्र ने दी जो इतने कम समय में मेडिकल आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भरता छोड़कर अब उसका निर्यात करने लगा है। श्री मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को दिये अपने संबोधन में कहा,“ कोरोना के संकट काल में हमने देखा कि बहुत सी चीजों के लिए हम कठिनाई में हैं। दुनिया से लाना है और दुनिया दे नहीं पा रही है। हमारे देश के नौजवानों ने , उद्यमियों ने , उद्योग जगत के लोगों ने यह बीड़ा उठा लिया कि जिस देश में पहले एन95 मास्क नहीं बनते थे, बनने लगे, पीपी किट नहीं बनते थे, बनने लगे, वेंटिलेटर नहीं बनते थे, बनने लग गये। देश की आवश्यकताओं की पूर्ति तो हुई लेकिन साथ ही जब दुनिया को जरुरत हुई और आत्मनिर्भर भारत दुनिया को कैसे मदद करता है, हमने देखा। विश्व की भलाई में भारत का योगदान बढ़ाना हमारा दायित्व बनता है।” उन्होंने कहा ,“ कोरोना के कालखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र की तरफ ध्यान जाना बहुत स्वाभाविक है। आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी सीख स्वास्थ्य क्षेत्र ने हमें संकट के इस काल में सीखा दी है और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें आगे भी बढ़ना है। कोरोना संकट से पूर्व देश में मात्र एक कोरोना टेस्टिंग लैब थी लेकिन अब 1,400 लैब हिंदुस्तान के हर कोने में फैला है। जब कोरोना का संकट आया तब एक दिन में मात्र 300 टेस्ट हो पाते थे लेकिन अब हर दिन सात लाख से ज्यादा टेस्ट हो पा रहे हैं। स्वास्थ्य का क्षेत्र जब आत्मनिर्भर बनता है तो दुनिया में स्वास्थ्य पर्यटन स्थल के रूप में ख्याति पाता है। ” प्रधानमंत्री ने कहा,“ देश तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इतिहास गवाह है कि भारत एक बार अगर ठान लेता है तो भारत करके रहता है। कोरोना महामारी के दौरान जब हम आत्मनिर्भरता की बात करते हैं तो दुनिया को उत्सुकता भी है और अपेक्षा भी है और उस अपेक्षा को पूरा करने के लिए अपने आप को योग्य बनाना बहुत आवश्यक है। अपने आप को तैयार करना बहुत आवश्यक है। जगकल्याण के लिए हमें खुद को सामर्थ्यवान बनाना होगा। ”

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