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अक्षय तृतीया से सजेगा ‘लाला’ का फूल बंगला

मथुरा। उत्तर प्रदेश में कान्हानगरी मथुरा के वृंदावन में गर्मी से ठाकुरजी को निजात दिलाने के लिये 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर सप्त देवालयों में फूल बंगला बनाने की शुरूआत हो जायेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन दिवस पर विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं तथा जगत की रचना करने वाले ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार भी इसी दिन प्रकट हुए थे। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से जीवन की सारी बाधाएं दूर होती है। इस बार यह पर्व रविवार को रोहणी नक्षÞत्र में पड़ने के कारण बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक के सुझाव पर इस बार अक्षय तृतीया के पर्व पर ब्रज के मंदिरों समेत देश के सभी मंदिरों में कोरोना वायरस के भारत से निर्मूल करने की प्रार्थना की जाएगी। राधा दामोदर मंदिर वृन्दावन के सेवायत आचार्य कनिका गोस्वामी ने बताया कि देश के विभिन्न भागों में भले ही अक्षय तृतीया अलग अलग तरीके से मनाई जाती हो पर व्रजभूमि में यह पर्व चन्दन यात्रा के रूप में ही जाना जाता है। ठाकुर जी के अंग में चंदन लेपन की शुरुआत श्रील जीव गोस्वामी ने की थी। इस दिन ठाकुर के शरीर में न केवल चंदन का लेपन किया जाता है बल्कि ठाकुर के वस्त्र , मुकुट, बंशी, गले का हार, बाजूबन्द,बगलबंदी आदि भी चंदन से बनाए जाते हैं। इस दिन मंदिरों में कई किलो घिसे हुए चंदन की आवश्यकता होती है  इसलिए  मंदिरों में चन्दन का घिसना एक महीना पहले ही शुरू हो जाता है। इस दिन से ठाकुर के भोग में सत्तू, खरबूजा , ककड़ी जैसे शीतल फल, शीतल भोग, शरबत आदि का प्रयोग किया जाता है। लाक डाउन के कारण इस बार चन्दन यात्रा मंदिर के अन्दर ही मनाई जाएगी और भक्तों का मंदिर में प्रवेश निषेध रहेगा लेकिन मंदिर की ओर से वेबसाइट या फेसबुक के माध्यम से भक्तों को दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है।

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