फिटनेस मंत्र बन चुकी साइकिल से पर्यावरण प्रदूषण शून्य

फोटोकैप्शन:- ट्रांस हिंडन के साइकिल प्रेमी वरिष्ठ पत्रकार व लेखक गौरव पांडेय।
यदि आप ग्लोबल वार्मिंग से देश-दुनिया को महफूज रखना चाहते हैं तो रोजमर्रे के कामों में साइकिल का अनुप्रयोग करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना होगा। इससे न केवल डीजल-पेट्रोल पर व्यय होने वाली विदेशी मुद्रा बचेगी, पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा, बल्कि आमलोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खुद को ज्यादा फिट महसूस करेंगे। जब हमारे पड़ोसी चीनी लोग और सुदूर मित्र जापानी लोग अपने रोजमर्रा के कार्यों को स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से संपादित करने की जगह सिर्फ साइकिल से सम्पादित कर सकते हैं, तो फिर हम भारतीय क्यों उनसे पीछे रहें।
आज हमें इस निकृष्ट सोच से ऊपर उठना चाहिए कि  साइकिल समाज के ऐसे वंचित वर्ग के यातायात का माध्यम है जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट या स्कूटर, मोटरसाइकिल के महंगे ईंधन का खर्च वहन नहीं कर सकते। क्योंकि 21वीं शताब्दी में यह तस्वीर कुछ बदली बदली हुई नजर आ रही है। वैसे तो भारत में साइकिल का प्रचलन करीब 1960 के आसपास प्रारंभ हुआ, लेकिन अब इसके उपयोग को पर्यावरण हित में बढ़ावा देना चाहिए। इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि साइकिल अब एक फिटनेस मंत्र बन चुकी है। लोग बाग अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने, अपने कार्यस्थल पर पहुंचने के अलावा इसे फिटनेस के लिए भी अब नियमित रूप से चलाया जा रहा है।
साइकिलिंग कोच एवं एक्सपर्ट बताते हैं कि साइकिलिंग में शरीर की कार्डियो एक्सरसाइज होती है जो कि हृदय के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। दूसरी खास बात यह है कि साइकलिंग एक ऐसा स्पोर्ट्स है जिसमें शरीर की रिकवरी सबसे जल्दी होती है। नियमित रूप से साइकिलिंग करने के अनेक लाभ हैं जिनमें शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा कैलोरी की खपत, एक्स्ट्रा फैट को खत्म करना और मांस पेशियों को मजबूत बनाना प्रमुख हैं। सामान्य तौर पर यह देखा जाता है कि साइकिलिंग करने के लिए बच्चे, युवा एवं अधेड़ उम्र के लोग भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। मैंने भी करीब 45 वर्ष की उम्र में अपने मित्रों से प्रेरित होकर साइकिलिंग प्रारंभ की और नित्य प्रतिदिन मेरी रुचि इसमें बढ़ती जा रही है।
# साइकिल का चयन करने से पहले कीजिए इन बातों पर गौर
किसी के भी सामने सबसे पहले साइकिल चुनने का प्रश्न सामने आता है जिसमें मुख्यतया तीन तरह की साइकिल में से किसी एक का चयन करना होता है। एक प्रकार की साइकिल होती है जिसे माउंटेन टिरेन बाइक या एमटीबी कहते हैं। इसे हम आसानी से पहचान सकते हैं क्योंकि इसके टायर सामान्य साइकिल से थोड़े चौड़े होते हैं और यह गड्ढों भरे रास्तों में या कच्चे रास्तों पर भी चलाने के  काम आती है। वहीं, दूसरी तरह की साइकिल हाइब्रिड साइकिल होती हैं जिनमें एमटीवी से थोड़े पतले टायर होते हैं, लेकिन उनमें शौकर होता है जिसकी वजह से उसे भी प्लेन सड़क या गड्ढे वाली सड़क दोनों पर चलाया जा सकता है। जबकि तीसरे प्रकार की साइकिल रोडी होती है, जिनमें ड्रॉप हैंडल होता है और सामान्य रूप से उनमें शौकर नहीं होता। इसे मुख्य सड़क पर ही चलाया जा सकता है। गड्ढे भरी सड़कों पर उसको चलाने में बहुत दिक्कत आती है, क्योंकि उसके टायर बहुत ही पतले होते हैं और आसानी से उनमें पंचर हो जाता है।
बता दें कि यह तीनों साइकिलें जो सामान्य तौर पर सड़क पर आपने नित्य काम करने वालों को चलाते हुए देखा होगा, उनसे अलग होती हैं। इसलिए अपनी साइकिल का चयन करने के बाद इसमें अन्य चीजों का भी चयन करना होता है जैसे कि गियर के साथ या बिना गियर की साइकिल। बिना गियर की साइकिल नित्य प्रति 5 किलोमीटर से 10 किलोमीटर तक चलाने के लिए ही उचित रहती है, लेकिन यदि आपको लंबी दूरी में साइकिल चलानी है या ग्रुप में अन्य लोगों के साथ चलानी है तो इसमें आपको दिक्कत आएगी। क्योंकि आप इसे ज्यादा लंबा नहीं चला सकते। जब अन्य लोगों की साइकिल में गियर होगा तो वह आपसे तेज चलेंगे। इसलिए अपनी जरूरत के मुताबिक आप गियर या नॉन गियर वाली सायकिल का चयन कर सकते हैं।
आज की तारीख में आप साइकिल की शॉप पर जाकर अपनी साइकिल का चयन कर सकते हैं और कुछ साइकिल की शॉप वाले आपको यह ऑप्शन भी देते हैं कि आप साइकिल चलाइए और 2-3 दिन के अंदर यदि आपको साइकिल पसंद नहीं आती और आप साइकिल की वैरायटी चेंज करना चाहते हो तो आप कर सकते हैं। ऐसे में आपको साइकिल की ट्रायल लेने का पूरा मौका मिल जाता है और अपनी जरूरत के हिसाब से आप अपनी साइकिल का उचित चुनाव कर सकते हैं।
साइकिल के चयन में कुछ चीजें ध्यान देने वाली होती हैं जिनमें प्रमुख है अच्छी क्वालिटी का गियर और गियर शिफ्टर, टायर और टायर के रिम की क्वालिटी, डिस्क ब्रेक, सॉकर, साइकिल की बॉडी यदि अल्युमिनियम एलॉय की हो तो ज्यादा अच्छा है। साइकिल का वजन जितना कम होगा उतना अच्छा है। साइकिल की ऊंचाई आप की ऊंचाई के अनुसार ही होनी चाहिए।
साइकिलिंग करने के लिए आपको उचित ड्राई फिट टी-शर्ट जिसमें पसीना जल्दी सूख जाता हो या जर्सी, साइकलिंग शॉर्ट्स जो फोम पैड या जेल पैड के हों, जिससे कि आप साइकिल की सीट पर देर तक बैठ सकते हो। धूल मिट्टी से बचने के लिए चश्मा, अच्छी क्वालिटी का हेलमेट होना चाहिए। हेलमेट लेते समय यह ध्यान रखें कि सस्ता हेलमेट जिनके अंदर हल्की क्वालिटी का थर्माकोल लगा होता है वह लेने से बचें। साइकलिंग के दस्ताने जिनमें जेल पैड या फोम हो, अच्छी क्वालिटी की जुराबें और जूते प्रमुख हैं।
यदि आप साइकिलिंग सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करते हो तो कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, जैसे कि साइकिल में उचित लाइट जिनमें हेड लाइट, टेल लाइट एवं ब्लिंकिंग लाइट प्रमुख हैं। साथ ही आपको पंक्चर रिपेयर किट, हवा भरने का पंप और टूल किट जरूर रखनी चाहिए। क्योंकि ऐसे समय में साइकिल रिपेयर शॉप के खुली होने की संभावना बहुत कम होती है।
यदि आप धूप में साइकिल चलाते हैं तो आपको धूप की हानिकारक किरणों से बचने के लिए सनब्लॉक वाली टीशर्ट और स्लीव्स का उपयोग करना चाहिए और साथ ही सनस्क्रीन लोशन भी लगाना चाहिए। अन्यथा यदि आप लंबे समय तक साइकिल चलाएंगे तो आपके हाथ और पांव अलग से काले दिखाई देने लगेंगे।
साइकिल लेते समय साइकिल की एसेसरीज भी बहुत महत्व रखती हैं जैसे कि घंटी, बॉटल होल्डर, मोबाइल होल्डर या बैग, टूल बैग, सीट, स्टैंड, मडगार्ड। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि हम जब साइकिल चलाएं तो हमारे साथ एक या दो कोराइडर जरूर हों। लंबी दूरी के लिए साइकिल चलाने के लिए ग्रुप में चलाना ही सबसे उचित है।
# साइकिलिंग प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने से पहले रखिए इन बातों का ख्याल  
कुछ समय बाद जब आप साइकिल चलाने में पारंगत हो जाएं तो आप साइकिलिंग प्रतिस्पर्धाओं में भी भाग ले सकते हैं, जिन्हें भारत में प्रोफेशनल तरीके से कराया जा रहा है। इसमें शामिल होकर आप 200, 300, 600, 1000 और 1200 किलोमीटर तक भी साइकिल चलाने के इवेंट में भाग ले सकते हैं जो कि अपने आप में आपको फिट होने का आत्मविश्वास दिलाएगा और आपके जीवन में एक नया रोमांच पैदा करेगा।
मैंने देखा है कि जब हम साइकिलिंग करते हैं तो बहुत सारे लोग हमारी ओर उत्साह से देखते हैं और हमारी हौसला अफजाई भी करते हैं। कभी थम्बस् अप करके, कभी हाथ हिला कर या ताली बजाकर लोग साइकिल चलाने वालों का आत्मविश्वास बढ़ाते हुए भी नजर आ जाते हैं। साइकिलिंग करने से हम बच्चों और युवा पीढ़ी के लिए एक फिटनेस का संदेश दे सकते हैं और उन्हें प्रेरित कर सकते हैं। इसलिए मैं समझता हूं कि यह एक बहुत ही अच्छा माध्यम है जिससे हम खुद फिट रहने के साथ ही औरों को भी फिट रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
साइकिलिंग करते समय आपके शरीर का पसीना बहुत निकल जाता है, इसलिए अपने आपको ठीक तरीके से हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में पानी, इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थ एवं अन्य पोषक चीजें बहुत जरूरी है। लंबी दूरी की साइकिल चलाने के लिए आपको ऊर्जा की आवश्यकता होगी और ऐसे में अनाप-शनाप चीजों को खाने से बचने के लिए आपके पास ग्लूकोस बिस्किट, बादाम, केले, एनर्जी बार या जेल जैसी चीजें होनी चाहिए।
वहीं, दूसरी बहुत ही ध्यान रखने वाली चीज यह है कि यदि आप लंबी दूरी के साइकिल चलाते हैं तो आपके पास एक स्पोर्ट्स वॉच होनी चाहिए जिससे आपकी हृदय गति, ऑक्सीजन सैचुरेशन एवं अन्य जरूरी पैरामीटर्स की जांच होती रहे और अलर्ट आते रहें। कभी भी ज्यादा थकान या ज्यादा हृदय गति होने पर विश्राम ले लेना चाहिए और हृदय गति सामान्य होने पर ही साइकिल चलानी चाहिए।
वहीं, ऐसे लोग जिन्हें रक्तचाप, हृदय की बीमारी हो या नर्वस् सिस्टम की या अन्य बीमारी हो, उन्हें अपने चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही लंबी दूरी की साइकिल चलानी चाहिए। सामान्य तौर पर आनंद लेते हुए साइकिल चलाने की स्पीड 10 से 15 से किलोमीटर प्रति घंटा निकल कर आती है। वहीं, जो नियमित रूप से साइकिल चलाते हैं उनकी स्पीड 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक भी आ जाती है। वहीं, जो प्रोफेशनल साइकिल चलाते हैं और रोडी या हाइब्रिड साइकिल का प्रयोग करते हैं, वो 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड भी निकाल लेते हैं।
# विदेशों में साइकिल से लोग पहुंचते हैं ऑफिस, लंबी दूरी के गंतव्य स्थानों पर पहुंचने के लिए भी करते हैं बहुधा प्रयोग
आपको यह जानकर खुशी होगी कि विदेशों में साइकिल का उपयोग नित्य ऑफिस जाने के लिए, लंबी दूरी के गंतव्य स्थानों पर पहुंचने के लिए भी होता है। चीन व जापान जैसे देशों में भी लोग साइकिल को ही नित्य प्रतिदिन के कार्यों के लिए भी उपयोग में लाते हैं। विदेशों की तर्ज पर अब भारत में भी इलेक्ट्रिक साइकिल उपलब्ध हैं, जिन्हें एक बार चार्ज करने पर 15 से 20 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। यदि आप इलेक्ट्रिक साइकिल को पैडल से बीच बीच में खुद ही चलाते हैं तो ऐसे में इसे थोड़ी और दूरी तक चलाया जा सकता है। वहीं, बैटरी खत्म होने पर इलेक्ट्रिक साइकिल को पैडल से भी चलाया जा सकता है।
रोचक बात यह है कि साइकिल का भी इंश्योरेंस होता है जो कि साइकिल की चोरी होने को कवर करता है और साइकिल के एक्सीडेंट या डैमेज होने पर भी कवरेज मिलती है। ऐसे में खास बात ध्यान रखने की यह है कि साइकिल के इस इंश्योरेंस को साइकिल खरीदने के पहले दिन ही कराना होता है, अन्यथा आप इसे नहीं करा सकते।

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