मानवता और करुणा का एक विश्वविद्यालय ‘के.आई.आई.टी.’

विविधतापूर्णकार्यकलापों के साथ सावधानी पूर्वक तैयार किया गया ”कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (के.आई.आई.टी.)” भुवनेश्वर का डीम्ड विश्वविद्यालय छात्रों को अपनी सर्वश्रेष्ठ एवं उत्कृष्ट क्षमता प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होने के लिए अपनेप्रकार का कई पहलुओं वालाएक बहुआयामीविश्वविद्यालय है। मानवता और करुणा के सिद्धांतों पर आधारित, के.आई.आई.टी. न केवल एक व्यापक श्रेणी के शैक्षणिक कार्यक्रमों की पेशकश करने के लिए, अपितु छात्रों के समग्र विकास और इसके महान सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए भी प्रसिद्ध है। प्रत्याशित है कियह विश्वविद्यालय अपने परिसर के प्लेसमेंट में प्रतिष्ठित नौकरी पाने वाले उज्ज्वल छात्रों के अलावा, ओलंपियन्स, आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अधिकारियों और सफल उद्यमियों सहित असंख्य क्षेत्रों में उच्च उपलब्धि हासिल कर रहा है।
के.आई.आई.टी. देश में सबसे अधिक छात्र-हितैषी परिसरों में से एक है। भारत देश के कोने-कोने से तथा 53 अन्य देशों से आने वाले 30,000 छात्र समुदाय, वृहद परिसर और विभिन्न सुविधाओं का लाभार्जन करते हुए संतुष्ट और अनुशासित रहते हैं, क्योंकि के.आई.आई.टी. संस्थान की पूरी कार्य-प्रणाली और संरचना छात्र-केंद्रित है।छात्रों को अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता को विकसित करने तथाकुछ बड़ा हासिल करने के लिए इसे सक्षम बनाया गया है।
एक प्रतिष्ठित व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में के.आई.आई.टी. की स्थापना, प्रख्यात शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर अच्युत सामंत के कर कमलों द्वारा सन् 1992-93 में की गयी थी। सन् 1997 में इसने एक उच्च शैक्षिक संस्थान के रूप में आकार लिया, जिसे आधार वर्ष के रूप में जाना जाता है, और सन् 2004 में इसे डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में घोषित किया गया। आज यह देश के सबसे अधिक मांग वाले विश्वविद्यालयों में से एक बनकर ख्याति अर्जित कर रहा है, जो अपने विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान के लिए जाना जाता है।भारत सरकार ने ‘इन्स्टीच्यूशन ऑफ एमिनेंसÓ (आई.ओ.ई.) अर्थात प्रख्यात संस्थान के उपाधि की मान्यता को अग्रेषित कर ”ब्राण्ड के.आई.आई.टी.ÓÓ कर दिया। आई.ओ.ई. सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के विश्वस्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों में से 10 चुनिंदा विश्वविद्यालयों को विकसित करना चाहता है।
अल्प समय में इतनी ख्याति अर्जित करने वालाएक बहुत ही युवा संस्थान होने के बावजूद – एक संस्थान के रूप में 23 वर्ष और एक विश्वविद्यालय के रूप में 16 वर्ष- र्के.आई.आइ.टी. विभिन्न सतहों (इमदबीउंता) से राष्ट्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में प्रभावशाली स्थान प्राप्त कर रहा है। हाल ही में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित अटल रैंकिंग ऑफ इंस्टीट्यूशंस ऑन इनोवैशन एचीवमेन्ट्स (ए.आर.आई.आई.ए.) 2020 में भारत के स्व-वित्तपोषण संस्थानों में इसे पहला स्थान दिया गया था। नेशनल इन्स्टीच्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एन.आई.आर.एफ.),शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतीय विश्वविद्यालयों में के.आई.आई.टी.24वें स्थान पर है। क्यू.एस. और टाइम्स हायर एजुकेशन जैसी अन्तराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में भी र्के.आई.आइ.टी.प्रभावशाली स्थान प्राप्त कर रहा है।
विश्व में ज्ञान के क्षेत्र में तीव्रता से सामाजिक बदलावआया है, जहां मात्र शैक्षिक डिग्री प्राप्त कर लेना ही सफलता का सूचक नहीं होता है। के.आई.आई.टी. ने परिवर्तन के साथ सामंजस्य बनाए रखते हुए अपने पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र को अपनाया है और यह सुनिश्चित किया है कि किसी विशिष्ट कार्य-क्षेत्र में अध्ययनार्थी ज्ञान और कौशल के अभिलाषित या वांछित स्तर को प्राप्त कर रहा है कि नहीं। स्पैनिंग, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी, लॉ और अन्य कई क्षेत्रों में 200 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ28 संघटक स्कूलों के प्रस्तुतीकरण के साथ के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय ज्ञान के एकीकरण के लिए एक आदर्श (उवकमस) बन गया है। विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला से अपना ऐच्छिक चुनने का छात्रों के पास अवसर होता है।
के.आई.आई.टी. ने परियोजना पर आधारित लर्निंग सहित छात्र-केंद्रित शिक्षणशास्त्र को लागू किया है। इस नवीनतम प्रयास में कक्षा व्याख्यान और परिवर्तनात्कमक शिक्षण का प्रशस्त संयोजन शामिल है, जैसे कि सजीव उद्योग परियोजना, सतत तंत्र प्रक्रिया, अपनी भूमिका का क्रियान्वयन, अध्ययन सहित परिस्थिति का प्रस्तुतीकरण, सेमिनार, व्यावसायिक अभ्यास, सामूहिक चर्चा, क्षेत्रीय गतिविधियां, अनुसंधानिक गतिविधियां, औद्योगिक मुआयना, परियोजना और शोध (तर्क-वितर्क), उत्क्रम अध्यापन विधि का उपयोग, इत्यादि। वर्ष भर में आयोजित कई शैक्षणिक सम्मेलनों, सेमिनार और कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए आने वाले प्रख्यात शिक्षाविदों, कानूनी प्रकाशकों, कॉर्पोरेट नेताओं, नीति निर्माताओं और वैज्ञानिकों के साथ छात्रों द्वारा भाग लेने और परस्पर वार्तालाप करने से उन्हें बेजोड़ प्रदर्शन मिलता हैं। अब तक 20 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने के.आई.आई.टी. का दौरा किया है और नोबेल व्याख्यान श्रृंखला व के.आई.आई.टी. नॉलेज ट्री के तहत बातचीत की है, जो छात्रों को संसर्ग प्रदान करने की एक अनूठी पहल है।
इन शैक्षणिक नवाचारों का प्रभाव कैंपस प्लेसमेंट में के.आई.आई.टी. छात्रों की सफलता से परिलक्षित होता है। विश्वविद्यालय का अपनी स्थापना के बाद से एक उल्लेखनीय परिसर प्लेसमेंट रिकॉर्ड है। विभिन्न मापदंडों में हर वर्ष एक महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जैसे कि वेतन पैकेज, कंपनियों की संख्या और गुणवत्ता आदि। इसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और ब्रांड वैल्यू के कारण, विश्वविद्यालय का भर्ती अभियान शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करता है। के.आई.आई.टी. हर वर्ष लगभग 3000 छात्रों को प्रौद्योगिकी धाराओं ह्लद्गष्द्धठ्ठशद्यशद्द4 ह्यह्लह्म्द्गड्डद्वह्य में शामिल कर रहा है। इस वर्ष लगभग 1200 छात्रों (40 प्रतिशत) ने 6.5 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये की सीमा मेंउच्च वेतन पैकेज के साथ नौकरी की पेशकश की है। यह देश के किसी भी अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के बराबर है। शेष छात्रों को भी 4.5 लाख रुपये से लेकर 6.5 लाख रुपये की सीमा मेअच्छे पैकेज वाली अच्छी राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में रखा गया है। अन्य धाराओं ;ेजतमंउेद्धजैसे प्रबंधन, जैव प्रौद्योगिकी, कानून, कंप्यूटर अनुप्रयोग और ग्रामीण प्रबंधन में कैम्पस प्लेसमेंट समान रूप से अच्छा है।
प्लेसमेंट से परे, कई छात्र अपने स्वयं के उद्यम को स्थापित करने के लिए डी.एस.टी. से मान्यता प्राप्त केंद्र के.आई.आई.टी.-टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर (के.आई.आई.टी.-टी.बी.आई.) के सहयोग सेआगे बढ़ते हुएआरम्भ करते हैं, जो नवोदित उद्यमियों को हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान करता है। के.आई.आई.टी., जिसमें 195 प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थानों के साथ अकैडमिक टाई-अप (शैक्षणिक सम्बद्धता) है, उच्च शिक्षा के लिए हर वर्षविदेश में जाने वाले लगभग 500 छात्रों को सहयोग करता है। कुछ अन्य छात्रों ने यू.पी.एस.सी., यू.जी.सी. और अन्य निकायों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की भर्ती परीक्षा में सफलता पाई है। के.आई.आई.टी. को आई.ए.एस., आई.पी.एस. और आई.ई.एस. अधिकारियों का उत्पादन करने पर गर्व है।
के.आई.आई.टी. लगातार छात्रों की रचनात्मकता का पोषण करता है और नये-नये अनुसंधान के लिए छात्र अनुसंधान सेल की स्थापना की है। यह छात्रों को प्रोत्साहित करता है और शैक्षिक संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों में शोध पत्र लिखने और उन्हें प्रस्तुत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। के.आई.आई.टी. के छात्रों को अपने अनुसंधान परियोजनाओं के लिए गौरव प्राप्त हुआ है कि उनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सराहना की जा रही है। छात्रों द्वारा लिखे गए कई शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
के.आई.आई.टी. ने एक अत्यधिक प्रभावी परामर्श कार्यक्रम लागू किया है, जो शैक्षणिक के साथ-साथ छात्रों के सामाजिक और भावनात्मक विकास को नई आभा देती है। परामर्शस्वयं के लिए मानसिक रूप से आदर्श भूमिका अदा करने के लिएभावनात्मक और शैक्षणिकअवलम्ब, मार्गदर्शन, प्रेरणा का प्रतिरूप ;उवकमसद्धप्रदान करते हैं और उन्हें अपने कैरियर के विकास में भी सहायक सिद्ध होते हैं। छात्र समुदाय के सर्वांगीण विकास को उत्प्रेरित करने के लिए के.आई.आई.टी. स्टूडेन्ट ऐक्टिविटी सेन्टर से 25 से अधिक दोलनशील जीवंत छात्र समाज इस कार्य-पद्धति में निरन्तर गतिशील हैं। साहित्य सम्बन्धी क्षेत्रों से जुड़ी संस्थाएँ, फिल्म निर्माण और सामाजिक कार्यों से लेकर यंत्रमानशास्त्र (रोबोटिक्स) तक सभी, शैक्षणिक के साथ ही साथ रचनात्मकता में छात्रों के समग्र विकास में योगदान करते हैं।
एक विश्वविद्यालय के रूप में एक परिदृष्य के साथ, के.आई.आई.टी., छात्रों के बीच खेल-कूद और क्रीड़ा को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देता है। एक ओलंपियन और कई अन्य खिलाड़ियों (ंजीसमजमे), जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय खेलों में देश के लिए पदक जीते हैं, जैसे राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और संसार के विश्वविद्यालयी खेल, उनका उत्पादन करने पर गर्व है। भारत की सबसे तेज महिला धाविका, दुती चंद, जो अर्जुन पदक द्वारा पुरस्कृत हैं और सबसे तेज पुरुष धावक, आमिया मलिक दोनो ही के.आई.आई.टी. के छात्र हैं। देश का सबसे विस्तृत और व्यापक खेल ढांचा एक ही स्थान पर यहीं स्थित है। इसमें एक विश्वस्तरीय मल्टी-स्पोर्ट स्टेडियम और विभिन्न परिसरों में फैला हुआ 16 अंतर्राष्ट्रीय मानक खेल परिसर शामिल हैं। हाल ही मेंके.आई.आई.टी. ने देश के सबसे बड़े असाधारण खेल के पहले खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की मेजबानी की।

के.आई.आई.टी. केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में ही शामिल नहीं है, अपितु यह दुनिया का एकमात्र स्व-वित्तपोषण विश्वविद्यालय है, जिसमें सामाजिकत:आगे निकलने की गतिविधियों का एक व्यापक दायरा भी है। कलिंग इन्स्टीच्यूट ऑफ सोसल साइन्स (के.आई.एस.एस.) आदिवासी बच्चों के लिए विश्व का सबसे बड़ा विशेषत:पूर्णरूपेण नि:शुल्क और पूरी तरह से शुल्क-मुक्त आवासीय संस्थान है जो सतत गतिशील है।के.आई.एस.एस.,60,000 आदिवासी बच्चों (30,000 मौजूदा छात्रों, 20,000 अच्छी तरह से एल्यूमिनी और 10,000 इसके विभिन्न उपग्रह केन्द्रों में संलग्न छात्रों) को के.जी. (बालवाणी) से लेकर पी.जी. (स्नातकोत्तर) तक समग्र शिक्षा, भोजन, रहने का स्थान, स्वास्थ्य देखभाल और दैनिक जीवन के दिनचर्या के अन्य सभी मूलभूत आवश्यकतों को प्रदान करता है। एक अद्वितीय प्रत्यक्ष विकास कार्रवाई में, के.आई.आई.टी. ने ओड़िशा के एक दूरदराज के गाँव (कालराबैंक) में एक ‘स्मार्ट विलेजÓ के रूप में शहर की सभी अत्याधुनिक सुविधाएँ प्रदान करते हुए उसे एकदम बदल दिया है, जबकि पंचायत (मानपुर) को एक आदर्श पंचायत के रूप में विकसित किया गया है। अपने कई सामुदायिक पहुँच से बाहर (वनजतमंबी) परियोजना में, के.आई.आई.टी.एक आकांक्षात्मक जिले में विकासात्मक कार्य की सुविधा प्रदान कर रहा है। विश्वविद्यालय ने कला, साहित्य, संस्कृति, फिल्म, मीडिया और आध्यात्म के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कोविद-19 महामारी के प्रकोप के बाद, के.आई.आई.टी. ने लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए तेजी से सार्थक कदम उठाये हैं। के.आई.आई.टी.का एक मेडिकल घटक (ूपदह) कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने ओड़िशा सरकार के सहयोग से भारत का पहला स्टैंडअलोन कोविद-19 अस्पताल स्थापित किया। इसके अतिरिक्त के.आई.आई.टी. ने एक-एक करके कोविड-19 के तीन और विशेष अस्पताल ओड़िशा के कंधमाल, बलांगीर और मयूरभंज जिलों में स्थापित किये हैं। एक वृहद मानवतावादी समुदायिक सेवा के अन्तर्गत के.आई.आई.टी. ने उन विभिन्न समूहों तक अपनी पहुँच बनाते हुए सहायता पहुंचाई है, जो बार-बार लॉक डाउन बढ़ाये जाने के कारण मुश्किल दौर का सामना कर रहे थे। अंत:क्षेप में 3 लाख से अधिक महामारी प्रभावित लोगों के लिए खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण शामिल है। एक अद्वितीय मानवीय संकेत में, के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय ने ओडिशा में कोविद-मृतक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह सुविधा दो शैक्षणिक वर्षों के लिए उपलब्ध होगी: वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 के लिए।

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