दिल्ली के क्लब क्रिकेट पर पड़ी है कोरोना की मार

दिल्ली का क्लब क्रिकेट खतरनाक कोरोना वायरस की मार झेल रहा है और इस सत्र के सभी हॉट वैदर क्रिकेट टूर्नामेंट कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। क्लब क्रिकेट दिल्ली की घरेलू क्रिकेट की जान है और यहां से ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं निकलती हैं। क्लब क्रिकेट से ही दिल्ली की विभिन्न टीमों को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिलते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी अपनी टीमों की तरफ से दिल्ली के हॉट वैदर टूर्नामेंटों में खेलते हैं। ये टूर्नामेंट घरेलू सत्र शुरू होने से पहले खिलाड़ियों को तैयार करने में मदद करते हैं लेकिन कोरोना के कारण इस बार सब कुछ ठप्प पड़ा हुआ है और स्थानीय खिलाड़ी इन्तजार कर रहे हैं कि कोरोना के कहर में कमी आये तो ये टूर्नामेंट शुरू हो सकें लेकिन ऐसी कोई सम्भावना दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। मार्च, अप्रैल, मई और जून का महीना दिल्ली क्लब क्रिकेट के लिए सबसे व्यस्त समय होता है और इसी समय में इन हॉट वैदर टूर्नामेंटों का आयोजन होता है। इस दौरान डीडीसीए लीग शुरू होती है जिसमें दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ डीडीसीए से मान्यता प्राप्त 110 क्लब खेलते हैं और इनमें से 40 टीमें डीडीसीए हॉट वैदर लीग के लिए क्वालीफाई करते हैं। ये सभी मैच उत्तर भारत की 40 डिग्री से ज्यादा की तेज गर्मी में खेले जाते हैं।
इनके अलावा अखिल भारतीय ओम नाथ सूद मेमोरियल टूर्नामेंट, गोस्वामी गणेश दत्त टूर्नामेंट, लाला रघुबीर सिंह टूर्नामेंट और लक्ष्मण दास टूर्नामेंट इस दौरान खेले जाते हैं जहां खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है।
ओम नाथ सूद टूर्नामेंट के आयोजक प्रमोद सूद ने बताया कि इस साल टूर्नामेंट का 29वां संस्करण मार्च के आखिर से होना था जिसमें 24 टीमों के भाग लेने की पुष्टि हो चुकी थी लेकिन कोरोना के कारण टूर्नामेंट को स्थगित कर दिया गया। प्रमोद सूद ने कहा, “मैं इस टूर्नामेंट का आयोजन 1994 से लगातार कर रहा हूं और कई अन्य टूर्नामेंट हैं जो 40 वर्षों से आयोजित हो रहे हैं। अभी तक ऐसा नहीं हुआ था कि हमें टूर्नामेंट को रद्द करना पड़े। कुछ बार ऐसा हुआ था कि मुझे टूर्नामेंट संपन्न कराने के लिए लोन लेना पड़ा था।”
प्रमोद सूद ने कहा, “एक टूर्नामेंट आयोजित करने में अच्छा-ख़ासा खर्च होता है। हर संस्करण पर 12-14 लाख रुपये का खर्चा आता है। पुरस्कार राशि, मैदान का किराया, अम्पायरिंग स्टाफ, खिलाड़ियों का खाना-पीना और उपकरणों आदि का खर्चा देखना पड़ता है। हालांकि टीमें प्रविष्टि शुल्क देती हैं लेकिन यह टूर्नामेंट की लागत को देखते हुए मामूली है।” इन टूर्नामेंटों के आयोजकों के लिए मुख्य चिंता है कि युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पा रहा है।
देश को युजवेंद्र चहल और पवन नेगी जैसे खिलाड़ी देने वाले कोच रणधीर सिंह का कहना है कि इन गर्मियों में खिलाड़ी लगभग 30-35 मैच खेल लेते हैं लेकिन कोरोना के कारण उनके हाथ से इस बार मौका निकलता जा रहा है। रणधीर रण स्टार क्रिकेट अकादमी के कोच भी हैं। रणधीर का कहना है है कि इन टूर्नामेंटों के मैच 40-40 ओवर के होते हैं इसलिए खिलाड़ियों को पर्याप्त मौका मिलता है।
जाने-माने कोच तारक सिन्हा का कहना है कि क्लब क्रिकेट से ही आपको बड़े स्तर के लिए प्रतिभाएं मिलती हैं। यहां खिलाड़ी की पहचान बन सकती है। प्रमोद सूद का कहना है कि उनके टूर्नामेंट में विरेन्द्र सहवाग, आकाश चोपड़ा, इशांत शर्मा, गौतम गंभीर, विराट कोहली जैसे खिलाड़ी भी खेले हैं और ये टूर्नामेंट प्रथम श्रेणी क्रिकेट में जाने की सीढ़ी है। सूद ने कहा कि विराट ने उनके टूर्नामेंट में 16 साल की उम्र में शतक बनाया था। रणधीर कहते हैं कि क्लब क्रिकेट आपको फिट रखता है ताकि घरेलू सत्र शुरू होने से पहले आप पूरी तरह तैयार रहें। प्रमोद सूद का कहना है कि उन्होंने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है और उन्हें लगता है कि यदि हालात ठीक होते हैं तो वह टूर्नामेंट को किसी रूप में करा सकेंगे। यही कारण है कि उन्होंने एक मैदान के लिए दी हुई ढाई लाख रुपये की जमा राशि अभी वापस नहीं ली है।

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